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सत्संग में मन लगाइए, कुसंगति अपने आप भाग जायेगी
Updated Mon, 27 Nov 2017 02:22 AM IST
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वाराणसी। अयोध्या में नित्य सत्संग होता था परंतु मंथरा के क्षणिक कुसंग के कारण माता कैकेयी में कुबुद्धि आ गई। परिणामस्वरूप भगवान राम को चौदह वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ा। गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस में लिखा है कि जहां समुति तहां संपत्ति नाना, जहां कुमति तहां विपत्ति निदाना। उक्त बातें संकटमोचन मंदिर में चल रहे मानस सम्मेलन के चौथे दिन रविवार को गाजीपुर से आए मानस मर्मज्ञ डा. उमाशंकर त्रिपाठी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि कुमति से ही विपत्ति का आगमन होता है। इससे बचने का सरल उपाय यह है की आप सत्संग करें, विपत्ति अपने आप भाग जाएगी। वहीं भोपाल से पधारे डा. राम आधार उपाध्याय ने मानस का वर्णन करते हुए कहा की प्राय: कहा जाता है कि लक्ष्मण का स्वभाव कठोर किन्तु बाल कांड से लेकर उत्तर कांड तक यह सिद्ध है की लक्ष्मण सभी भाइयों में सरल व कोमल स्वभाव के हैं।
सम्मेलन में मानस मर्मज्ञ पं. रामचीज उपाध्यायए, पं. भावेश पाण्डेय, पं. श्याम नारायण तिवारी, पं. नंदलाल उपाध्याय ने राम वनगमन, कैकेई कोप, केवट प्रसंग आदि की कथा का वर्णन किया। स्वागत महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र और संयोजन गोपाल पाण्डेय ने किया। संचालन राघवेन्द्र पाण्डेय तथा धन्यवाद रामयश मिश्र ने किया।
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उन्होंने कहा कि कुमति से ही विपत्ति का आगमन होता है। इससे बचने का सरल उपाय यह है की आप सत्संग करें, विपत्ति अपने आप भाग जाएगी। वहीं भोपाल से पधारे डा. राम आधार उपाध्याय ने मानस का वर्णन करते हुए कहा की प्राय: कहा जाता है कि लक्ष्मण का स्वभाव कठोर किन्तु बाल कांड से लेकर उत्तर कांड तक यह सिद्ध है की लक्ष्मण सभी भाइयों में सरल व कोमल स्वभाव के हैं।
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सम्मेलन में मानस मर्मज्ञ पं. रामचीज उपाध्यायए, पं. भावेश पाण्डेय, पं. श्याम नारायण तिवारी, पं. नंदलाल उपाध्याय ने राम वनगमन, कैकेई कोप, केवट प्रसंग आदि की कथा का वर्णन किया। स्वागत महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र और संयोजन गोपाल पाण्डेय ने किया। संचालन राघवेन्द्र पाण्डेय तथा धन्यवाद रामयश मिश्र ने किया।
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