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हुकुलगंज चर्म शोधन कारखाना अब करसड़ा होगा स्थानांतरित
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वाराणसी। हुकुलगंज में रहने वाले लोगों को जल्द ही बदबू और गंदगी से निजात मिल जाएगी। क्षेत्र में स्थित चर्म शोधन कारखाना शासन ने करसड़ा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए 4.96 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। चुनाव के बाद प्लांट के निर्माण काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। फिलहाल इसका डिजाइन तैयार किया जा रहा है। इसके बाद टेंडर होगा।
नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि करसड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बगल में सात हजार वर्ग फ ीट एरिया में चर्म शोधन प्लांट लगाया जाएगा। नए प्लांट को लगाया जाएगा। प्लांट के लिए स्थान चिह्नित कर लिया गया है और इसका डिजाइन तैयार किया जा रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा। बता दें कि हुकुलगंज के चर्म शोधन कारखाना में मृत पशुओं के खाल उतारने का काम होता है। वरुणापार के करीब 100 मोहल्ले इस चर्म शोधन कारखाने की दुर्गंध से परेशान रहते हैं। वहीं पौराणिक महत्व वाली वरुणा नदी में कारखाने का मल-जल प्रवाहित होता है। वैज्ञानिक विधि से निस्तारण नहीं होने से कुत्ते मृत जानवरों के अवशेष और मांस आदि को वरुणा नदी में खींच ले जाते हैं। खाल उतारने के बाद अवशेष वहीं पड़े रहते हैं, जिससे सारनाथ पुराना पुल से लेकर कैंट रेलवे स्टेशन तक बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है।
हुकु लगंज के चर्म शोधन कारखाने से निकलने वाली दुर्गंध को आम आदमी के साथ चार साल पहले तत्कालीन डीएम प्रांजल यादव ने भी महसूस किया था। सांस्कृतिक संकुल में बैठक से बाहर निकलने के दौरान उन्हें बदबू का आभास हुआ तो उन्होंने साथ चल रहे तत्कालीन एसएसपी अजय मिश्रा से इसके बारे में पूछा। एसएसपी ने इसकी जानकारी डीएम को दी। डीएम ने नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को तलब कर जमीन ढूंढ कर चर्म शोधन कारखाने को शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। उसी समय करसड़ा में जमीन चिह्नित हुई थी।
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नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि करसड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बगल में सात हजार वर्ग फ ीट एरिया में चर्म शोधन प्लांट लगाया जाएगा। नए प्लांट को लगाया जाएगा। प्लांट के लिए स्थान चिह्नित कर लिया गया है और इसका डिजाइन तैयार किया जा रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा। बता दें कि हुकुलगंज के चर्म शोधन कारखाना में मृत पशुओं के खाल उतारने का काम होता है। वरुणापार के करीब 100 मोहल्ले इस चर्म शोधन कारखाने की दुर्गंध से परेशान रहते हैं। वहीं पौराणिक महत्व वाली वरुणा नदी में कारखाने का मल-जल प्रवाहित होता है। वैज्ञानिक विधि से निस्तारण नहीं होने से कुत्ते मृत जानवरों के अवशेष और मांस आदि को वरुणा नदी में खींच ले जाते हैं। खाल उतारने के बाद अवशेष वहीं पड़े रहते हैं, जिससे सारनाथ पुराना पुल से लेकर कैंट रेलवे स्टेशन तक बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है।
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हुकु लगंज के चर्म शोधन कारखाने से निकलने वाली दुर्गंध को आम आदमी के साथ चार साल पहले तत्कालीन डीएम प्रांजल यादव ने भी महसूस किया था। सांस्कृतिक संकुल में बैठक से बाहर निकलने के दौरान उन्हें बदबू का आभास हुआ तो उन्होंने साथ चल रहे तत्कालीन एसएसपी अजय मिश्रा से इसके बारे में पूछा। एसएसपी ने इसकी जानकारी डीएम को दी। डीएम ने नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को तलब कर जमीन ढूंढ कर चर्म शोधन कारखाने को शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। उसी समय करसड़ा में जमीन चिह्नित हुई थी।
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