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बीएचयू सेंट्रल लाइब्रेरी में कंप्यूटर स्विच खरीद पर सवाल
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वाराणसी। बीएचयू के सेंट्रल लाइब्रेरी में कंप्यूटर स्विच खरीदारी को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि कंप्यूटर नेटवर्किंग के लिए स्विच खरीददारी के नियमों का उल्लंघन करते हुए 5.80 लाख रुपये में मिलने वाले स्विच के लिए 15.49 लाख का भुगतान कर दिया गया। ऑडिट जांच के दौरान ये गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद अब वित्त विभाग ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है।
सेंट्रल लाइब्रेरी में करीब 500 कंप्यूटर लगे हैं। यहां कंप्यूटरों के लिए स्विच खरीदे गए। सब कुछ होने के बाद जब फाइल भुगतान के लिए वित्त विभाग में गई तो नियमानुसार इसका सत्यापन कराया गया। पता चला कि जिस स्विच के लिए लाइब्रेरी की ओर से 15, 49,777 रुपये खर्च किया गया, उसकी कीमत 5,80, 150 रुपये है। मामला आडिट में गया तो वहां भी इस पर आपत्ति लगा दी गई। इंटरनल आडिट आफिसर की आपत्ति के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए वित्त अधिकारी ने भी जांच शुरू करा दी है। माना जा रहा है कि खरीददारी के नियमों की अनदेखी की वजह से 9696627 रुपये का अधिक भुगतान कर दिया गया है। उधर, आडिट आपत्ति वाली रिपोर्ट दोपहर बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
स्विच खरीददारी में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार खरीददारी की गई है। लाइब्रेरी से जुड़े कुछ लोग इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। विश्वविद्यालय के कागजात कैसे बाहर गए, इसकी जांच होनी चाहिए। -प्रो. एचएन प्रसाद, लाइब्रेरियन, सेंट्रल लाइब्रेरी
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सेंट्रल लाइब्रेरी में करीब 500 कंप्यूटर लगे हैं। यहां कंप्यूटरों के लिए स्विच खरीदे गए। सब कुछ होने के बाद जब फाइल भुगतान के लिए वित्त विभाग में गई तो नियमानुसार इसका सत्यापन कराया गया। पता चला कि जिस स्विच के लिए लाइब्रेरी की ओर से 15, 49,777 रुपये खर्च किया गया, उसकी कीमत 5,80, 150 रुपये है। मामला आडिट में गया तो वहां भी इस पर आपत्ति लगा दी गई। इंटरनल आडिट आफिसर की आपत्ति के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए वित्त अधिकारी ने भी जांच शुरू करा दी है। माना जा रहा है कि खरीददारी के नियमों की अनदेखी की वजह से 9696627 रुपये का अधिक भुगतान कर दिया गया है। उधर, आडिट आपत्ति वाली रिपोर्ट दोपहर बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
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स्विच खरीददारी में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार खरीददारी की गई है। लाइब्रेरी से जुड़े कुछ लोग इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। विश्वविद्यालय के कागजात कैसे बाहर गए, इसकी जांच होनी चाहिए। -प्रो. एचएन प्रसाद, लाइब्रेरियन, सेंट्रल लाइब्रेरी
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