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पति की रिहाई के लिए चक्कर काट रहीं मीरा
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वाराणसी। गाजीपुर और भदोही जिला जेल से एक-एक और वाराणसी सेंट्रल जेल से 270 कैदियों की समय पूर्व रिहाई होनी है। संस्तुति के लिए राज्यपाल को रिपोर्ट भेजी गई है। गणतंत्र दिवस तक सभी के छूटने की उम्मीद थी लेकिन आदेश रविवार तक नहीं आया है। इस कारण संबंधित कैदियों के परिजन जेलों का चक्कर काट रहे हैं। गणतंत्र दिवस पर अवकाश के बाद भी करीब सौ मुलाकाती अपनों की रिहाई की आस में यहां आए।
इनमें एक आजमगढ़ के उदरियावां गांव की मीरा तिवारी भी है। मीरा 23 जनवरी से लगातार सेंट्रल जेल का चक्कर काट रही हैं कि उनके पति प्रेम प्रकाश तिवारी को 22 साल बाद जेल से आजादी मिलेगी। यहां से पहले आजमगढ़ जेल में सात साल की सजा काट चुके पति के बाहर आने के बाद दो बेटों और एक बेटी के हाथ पीले करेंगी। मीरा बताती है कि गांव के ही प्रेम शंकर तिवारी की हत्या के आरोप में पति के जेल जाने के समय उनके बच्चे छोटे थे। बेटी निधि को मायके करमही, जफराबाद (जौनपुर) भेज दिया तो पुत्र विवेक और राज को अपने पास रखकर पढ़ाने लगी। अब विवेक बंगलुरू में इंजीनियर तो राज केरल की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा है। बेटी नई दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है। बच्चे पिता को निर्दोष मानते हैं। उनका फैसला है कि पिता की रिहाई के बाद ही शादी करेंगे। अब रिहाई के लिए वह व्याकुल हैं।
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इनमें एक आजमगढ़ के उदरियावां गांव की मीरा तिवारी भी है। मीरा 23 जनवरी से लगातार सेंट्रल जेल का चक्कर काट रही हैं कि उनके पति प्रेम प्रकाश तिवारी को 22 साल बाद जेल से आजादी मिलेगी। यहां से पहले आजमगढ़ जेल में सात साल की सजा काट चुके पति के बाहर आने के बाद दो बेटों और एक बेटी के हाथ पीले करेंगी। मीरा बताती है कि गांव के ही प्रेम शंकर तिवारी की हत्या के आरोप में पति के जेल जाने के समय उनके बच्चे छोटे थे। बेटी निधि को मायके करमही, जफराबाद (जौनपुर) भेज दिया तो पुत्र विवेक और राज को अपने पास रखकर पढ़ाने लगी। अब विवेक बंगलुरू में इंजीनियर तो राज केरल की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा है। बेटी नई दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है। बच्चे पिता को निर्दोष मानते हैं। उनका फैसला है कि पिता की रिहाई के बाद ही शादी करेंगे। अब रिहाई के लिए वह व्याकुल हैं।
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