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मुल्क की विरासत और पूंजी है उर्दू
Updated Fri, 17 Nov 2017 01:46 AM IST
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वाराणसी। उर्दू जुबान इस मुल्क की विरासत और पूंजी है। इसकी अपनी सभ्यता और संस्कृति है। उर्दू इस मुल्क की भाषा में ताजमहल सी हैसियत रखती है। उर्दू को किसी मजहब या वर्ग में नहीं बांधा जा सकता। यह हिंदुस्तान के करोड़ों देशवासियों के दिल की धड़कन है। ये बातें बीएचयू के उर्दू विभाग के हेड प्रो. आफताब अहमद आफाकी ने कहीं।
मशहूर शायर अल्लामा इकबाल की याद में गुरुवार को उर्दू बीटीसी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से ‘विश्व उर्दू दिवस’ के मद्देनजर पराड़कर भवन में ‘जश्न-ए-उर्दू’ सेमिनार में उन्होंने कहा कि किसी कौम को जिंदा रखने का जरिया उसकी मातृभाषा ही है। विशिष्ट अतिथि सेंट्रल हज कमेटी के सदस्य डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि उर्दू प्रदेश की दूसरी सरकारी भाषा है और इसकी तरक्की के लिए सभी को साथ आना होगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी बीबी चौधरी ने कहा कि जिस तरह अल्लामा इकबाल ने ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ की रचना कर देश की एकता और भाईचारे को एक सूत्र में पिरोया, वही काम उर्दू भी कर रही है।
अध्यक्षता मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने की। उन्होंने कहा कि अगर हम चाहते हैं कि हमारा समाज तरक्कीयाफ्ता हो तो जरूरी है कि उर्दू जुबान पर ध्यान दिया जाए। बच्चों के लिए उर्दू की तालीम को जरूरी किया जाए। इस अवसर पर नेशनल इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य फहीम अहमद, स्कालर पब्लिक स्कूल मऊ के निदेशक डॉ. शकील अहमद, सनबीम स्कूल की डॉ. अमृता पांडेय, शैलेंद्र विक्रम सिंह ने अपनी बातें रखीं। स्वागत जफर अंसारी ने किया। संचालन अब्दुर्रहमान और धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष डॉ. एहतेशामुल हक ने किया।
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मशहूर शायर अल्लामा इकबाल की याद में गुरुवार को उर्दू बीटीसी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से ‘विश्व उर्दू दिवस’ के मद्देनजर पराड़कर भवन में ‘जश्न-ए-उर्दू’ सेमिनार में उन्होंने कहा कि किसी कौम को जिंदा रखने का जरिया उसकी मातृभाषा ही है। विशिष्ट अतिथि सेंट्रल हज कमेटी के सदस्य डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि उर्दू प्रदेश की दूसरी सरकारी भाषा है और इसकी तरक्की के लिए सभी को साथ आना होगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी बीबी चौधरी ने कहा कि जिस तरह अल्लामा इकबाल ने ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ की रचना कर देश की एकता और भाईचारे को एक सूत्र में पिरोया, वही काम उर्दू भी कर रही है।
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अध्यक्षता मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने की। उन्होंने कहा कि अगर हम चाहते हैं कि हमारा समाज तरक्कीयाफ्ता हो तो जरूरी है कि उर्दू जुबान पर ध्यान दिया जाए। बच्चों के लिए उर्दू की तालीम को जरूरी किया जाए। इस अवसर पर नेशनल इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य फहीम अहमद, स्कालर पब्लिक स्कूल मऊ के निदेशक डॉ. शकील अहमद, सनबीम स्कूल की डॉ. अमृता पांडेय, शैलेंद्र विक्रम सिंह ने अपनी बातें रखीं। स्वागत जफर अंसारी ने किया। संचालन अब्दुर्रहमान और धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष डॉ. एहतेशामुल हक ने किया।
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