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ट्रेनों के इंजन में लगेंगे हाईटेक कैमरे
Updated Fri, 25 Aug 2017 02:11 AM IST
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वाराणसी। रेलवे ने लगातार हो रहे ट्रेन हादसे पर लगाम लगाने के लिए हाईटेक निगरानी की तैयारी शुरू कर दी है। अब रेल इंजन में कैमरे और पटरी पर सेंसर लगाए जाएंगे। डीजल रेल कारखाना (डीरेका) ऐसे रेल इंजन तैयार कर रहा है, जो अंदर और बाहर कैमरे के साथ ही चेहरे पहचानने वाले सॉफ्टवेयर से लैस होगा। सॉफ्टवेयर जरूरत पड़ने पर पायलट को चेतावनी जारी करेंगे। साथ ही इससे दुर्घटना के बाद जवाबदेही तय करने में भी मदद मिलेगी। डीरेका पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिसंबर तक ऐसे पांच डीजल इंजन बना लेगा।
डीरेका में विकसित इस तकनीक को लोको कैब वीडियो एंड वॉयस रिकॉर्डिंग सिस्टम (एलसीवीआर) नाम दिया गया है। इसमें वीडियो कैमरा, माइक्रोफोन और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर है। वॉयस रिकॉर्डर के जरिए पायलट और अन्य संबंधित के बीच होने वाली बातचीत का ब्योरा किसी जांच के दौरान उपलब्ध हो सकेगा। भविष्य में कैमरों को लोको कंट्रोल कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा। सर्वर से सीधे जुड़ने पर कहीं से भी ट्रेन के अंदर या बाहर ऑनलाइन देखा जा सकेगा। एक रेल इंजन में छह वीडियो कैमरे लगेंगे, जो हर मौसम में चौबीसों घंटे फोटो और वीडियो बनाने में सक्षम होंगे। कोहरे के दौरान भी इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। इनसे ट्रेन के सामने और केबिन पर नजर रखी जाएगी। कैमरों में चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर होंगे, जो लोको पायलट (ड्राइवर) के सजग न रहने या झपकी लेने की स्थिति में उन्हें अलर्ट भेजेंगे।
रेल अधिकारियों का दावा है कि इससे ट्रेन ड्राइवर पर नजर रखने और रेल दुर्घटनाओं का सही-सही कारण जानने में मदद मिलेगी। चेहरा पहचानने वाला सॉफ्टवेयर किसी तरह की जोखिम देखकर लोको कैब और ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर्स को अलर्ट कर देगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 25 डीजल रेल इंजनों में कैमरे लगाए जाएंगे। दिसंबर तक पांच ट्रेनों के इंजन में ये कैमरे लग जाएंगे। एक रेल इंजन में यह सिस्टम लगाने पर लगभग 3.2 लाख रुपये खर्च होंगे।
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डीरेका में विकसित इस तकनीक को लोको कैब वीडियो एंड वॉयस रिकॉर्डिंग सिस्टम (एलसीवीआर) नाम दिया गया है। इसमें वीडियो कैमरा, माइक्रोफोन और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर है। वॉयस रिकॉर्डर के जरिए पायलट और अन्य संबंधित के बीच होने वाली बातचीत का ब्योरा किसी जांच के दौरान उपलब्ध हो सकेगा। भविष्य में कैमरों को लोको कंट्रोल कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा। सर्वर से सीधे जुड़ने पर कहीं से भी ट्रेन के अंदर या बाहर ऑनलाइन देखा जा सकेगा। एक रेल इंजन में छह वीडियो कैमरे लगेंगे, जो हर मौसम में चौबीसों घंटे फोटो और वीडियो बनाने में सक्षम होंगे। कोहरे के दौरान भी इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। इनसे ट्रेन के सामने और केबिन पर नजर रखी जाएगी। कैमरों में चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर होंगे, जो लोको पायलट (ड्राइवर) के सजग न रहने या झपकी लेने की स्थिति में उन्हें अलर्ट भेजेंगे।
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रेल अधिकारियों का दावा है कि इससे ट्रेन ड्राइवर पर नजर रखने और रेल दुर्घटनाओं का सही-सही कारण जानने में मदद मिलेगी। चेहरा पहचानने वाला सॉफ्टवेयर किसी तरह की जोखिम देखकर लोको कैब और ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर्स को अलर्ट कर देगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 25 डीजल रेल इंजनों में कैमरे लगाए जाएंगे। दिसंबर तक पांच ट्रेनों के इंजन में ये कैमरे लग जाएंगे। एक रेल इंजन में यह सिस्टम लगाने पर लगभग 3.2 लाख रुपये खर्च होंगे।
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