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जीवनरक्षक होते हैं जीवाणु भोजी विषाणु
Updated Thu, 24 Aug 2017 02:47 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से गंगाजल में मिलने वाले कीटाणुओं को खाने वाले विषाणुओं पर शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का मंगलवार को समापन हो गया। दो दिन तक चले कांफ्रेंस में वक्ताओं ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा के साथ ही इसमें और अधिक अध्ययन पर बल दिया। इस दौरान बीएचयू के प्रो. गोपाल नाथ ने कहा कि इस बात को गहनता से समझने की जरूरत है कि जीवाणु भोजी विषाणु जीवन रक्षक होते हैं। जानवरों पर शोध के दौरान इसका परिणाम आया।
केएन उडप्पा सभागार में आयोजित कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आईसीयू में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को जब (सेप्टीसीमिया) खून का संक्रमण होता है, तो बहुत सी दवाएं काम नहीं करती है। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया कि ऐसे जीवाणु भी होते हैं जिन पर कोई एंटीबायोटिक दवा काम नहीं करती है, उन पर जीवाणुभोजी विषाणु को चूहों पर अध्ययन करके देखा गया है। इस अध्ययन में यह पाया गया कि विषाणु चूहों को मरने से बचाते हैं। दूसरी ओर अगर कई दिनों का संक्रमण है तो उसमें अधिक दवा देने से चूहे मरते हुए भी देखे गए हैं। इसके पहले दूसरे दिन पंजाब से प्रो. संजय छिब्बर, दिल्ली से डॉ. अमिता गुप्ता, हिसार से प्रो. बीएन त्रिपाठी, जोधपुर प्रो. राजेश कुमार दूबे आदि ने बैक्टिरीयोफ ाज व उनसे जुड़े तथ्यों को प्रमुखतासे रखा।इसके बाद पैनल चर्चा में अमेरिका से प्रो. विलियम समर्स, कर्नाटक प्रो. विनोद कुमार सहितकई लोगों ने भाग लिया।
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केएन उडप्पा सभागार में आयोजित कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आईसीयू में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को जब (सेप्टीसीमिया) खून का संक्रमण होता है, तो बहुत सी दवाएं काम नहीं करती है। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया कि ऐसे जीवाणु भी होते हैं जिन पर कोई एंटीबायोटिक दवा काम नहीं करती है, उन पर जीवाणुभोजी विषाणु को चूहों पर अध्ययन करके देखा गया है। इस अध्ययन में यह पाया गया कि विषाणु चूहों को मरने से बचाते हैं। दूसरी ओर अगर कई दिनों का संक्रमण है तो उसमें अधिक दवा देने से चूहे मरते हुए भी देखे गए हैं। इसके पहले दूसरे दिन पंजाब से प्रो. संजय छिब्बर, दिल्ली से डॉ. अमिता गुप्ता, हिसार से प्रो. बीएन त्रिपाठी, जोधपुर प्रो. राजेश कुमार दूबे आदि ने बैक्टिरीयोफ ाज व उनसे जुड़े तथ्यों को प्रमुखतासे रखा।इसके बाद पैनल चर्चा में अमेरिका से प्रो. विलियम समर्स, कर्नाटक प्रो. विनोद कुमार सहितकई लोगों ने भाग लिया।
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