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क्षीर सागर में आज से चार महीने के लिए शयन करेंगे भगवान
Updated Tue, 04 Jul 2017 02:23 AM IST
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वाराणसी। आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी मंगलवार को हरिशयनी पर्व पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषशैय्या पर योग निद्रा में लीन हो जाएंगे। हरिशयनी से हरि प्रबोधिनी एकादशी कर भगवान शयन करेंगे। कार्तिक में हरिप्रबोधिनी एकादशी पर भगवान भक्तों के काज के लिए भगवान जागेंगे। इससे पहले भगवान के शयन करने की अवधि तक सनातनी परंपरा में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। हरिशयनी तिथि को भगवान विष्णु की सविधि पूजा की जाएगी। श्रद्धालु घरों में तुलसी का पौधा भी लगाएंगे। संतों, संन्यासियों का चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो जाएगा।
हरिशयनी एकादशी सोमवार की रात 10.16 बजे ही लग गई। मंगलवार की रात 12.30 बजे तक यह तिथि रहेगी। हरिशयनी एकादशी का व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। इसी के साथ चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो जाएगा। खासतौर से संन्यासी चातुर्मास व्रत आरंभ करेंगे। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान तो सविधि होते रहेंगे, लेकिन शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी। हरिशयनी एकादशी को गंगा तटों पर स्नान के लिए व्रतियों की भीड़ लगेगी। श्रद्धालु गरीबों में अन्न, वस्त्र का दान, पुण्य करेंगे। सोने, चांदी की वस्तुओं के अलावा नए वस्त्रों का दान फलदायी होगा। ज्योतिषाचार्य बिमल जैन के अनुसार हरिशयनी एकादशी पर रात को मौन धारण कर जागरण करना चाहिए।
चातुर्मास व्रत के नियम
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-गुड़, तेल, शहद, मूली, परवल, बैगन, साग का सेवन नहीं करना चाहिए।
-ऋतुफल, मेवा, नए परिधानों का दान फलदायी
-साधु-संतों, साधकों को आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक व्रत धारण करने वाले स्थान को परिवर्तित नहीं करना चाहिए
-कहीं जाते समय रास्ते में नदी पड़े तो उसे पार न करें।
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हरिशयनी एकादशी सोमवार की रात 10.16 बजे ही लग गई। मंगलवार की रात 12.30 बजे तक यह तिथि रहेगी। हरिशयनी एकादशी का व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। इसी के साथ चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो जाएगा। खासतौर से संन्यासी चातुर्मास व्रत आरंभ करेंगे। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान तो सविधि होते रहेंगे, लेकिन शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी। हरिशयनी एकादशी को गंगा तटों पर स्नान के लिए व्रतियों की भीड़ लगेगी। श्रद्धालु गरीबों में अन्न, वस्त्र का दान, पुण्य करेंगे। सोने, चांदी की वस्तुओं के अलावा नए वस्त्रों का दान फलदायी होगा। ज्योतिषाचार्य बिमल जैन के अनुसार हरिशयनी एकादशी पर रात को मौन धारण कर जागरण करना चाहिए।
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चातुर्मास व्रत के नियम
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-गुड़, तेल, शहद, मूली, परवल, बैगन, साग का सेवन नहीं करना चाहिए।
-ऋतुफल, मेवा, नए परिधानों का दान फलदायी
-साधु-संतों, साधकों को आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक व्रत धारण करने वाले स्थान को परिवर्तित नहीं करना चाहिए
-कहीं जाते समय रास्ते में नदी पड़े तो उसे पार न करें।