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पूंजीवादी ने बर्बाद किया खेती किसानी
Updated Sun, 11 Jun 2017 01:27 AM IST
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चकिया। पूंजीवादी सरकारों द्वारा विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सुझावों पर देश में उदारीकरण तथा वैश्वीकरण थोपने से देश की कृषि अर्थव्यवस्था को तबाही के कगार पर ढकेल दिया है। सब्सिडी में कटौती करके सरकारों ने किसानों की फसल का लागत मूल्य बढ़ाया है तो वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य न बढ़ाकर किसानों को कर्ज केे दलदल में फंसा दिया है। इससे बेबस किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं। इससे सहदुल्लापुर स्थित अखिल भारतीय किसान सभा के द्वारा आयोजित गहराते कृषि संकट और उसके विकल्प विषयक प्रशिक्षण शिविर में अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय महासचिव दीनानाथ सिंह यादव ने कहीं।
उन्होंने कहा कि पूंजीवादी सरकारों द्वारा खुली अर्थ व्यवस्था तथा खुले बाजार की स्वीकृति देकर कृषि को घाटे का सौदा बना दिया गया है। सरकारें कारपोरेट खेती को किसानों पर लादने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों को भारत में बीज, खाद बेचने की अनुमति देकर कृषि उत्पादन को घटाने की साजिश पूंजीपतियों द्वारा रची गई है। इससे किसान भुखमरी के कगार पर पहुंचकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है। उन्होंने सन 1990 से पूर्व तथा 1991 के बाद की कृषि व्यवस्था में बदलावों को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण शिविर में नेताओं ने मध्य प्रदेश में किसानों पर गोली चलाने की घटना की निंदा करते हुए किसानों को राहत देने की मांग उठाई। प्रशिक्षण शिविर में रामअचल यादव, शंभूनाथ, मस्तराम, राजेन्द्र, मिठाईलाल, लालचंद, जमुना आदि ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष परमानंद ने की।
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उन्होंने कहा कि पूंजीवादी सरकारों द्वारा खुली अर्थ व्यवस्था तथा खुले बाजार की स्वीकृति देकर कृषि को घाटे का सौदा बना दिया गया है। सरकारें कारपोरेट खेती को किसानों पर लादने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों को भारत में बीज, खाद बेचने की अनुमति देकर कृषि उत्पादन को घटाने की साजिश पूंजीपतियों द्वारा रची गई है। इससे किसान भुखमरी के कगार पर पहुंचकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है। उन्होंने सन 1990 से पूर्व तथा 1991 के बाद की कृषि व्यवस्था में बदलावों को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण शिविर में नेताओं ने मध्य प्रदेश में किसानों पर गोली चलाने की घटना की निंदा करते हुए किसानों को राहत देने की मांग उठाई। प्रशिक्षण शिविर में रामअचल यादव, शंभूनाथ, मस्तराम, राजेन्द्र, मिठाईलाल, लालचंद, जमुना आदि ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष परमानंद ने की।
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