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अब घरों में पैदा हो रहे हैं शहर के बच्चे
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वाराणसी। शहर के अधिकांश बच्चे अब घरों में पैदा होने लगे हैं। जी हां, चौंकने की जरूरत नहीं है। यह आंकड़े नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग के हैं। दरअसल, ऐसा जन्मतिथि बदलने के लिए किया जा रहा है। अभिभावक यह कवायद स्कूलों में दाखिले के लिए कर रहे हैं।
मार्च-अप्रैल में जब बच्चों के नामांकन का समय आता है तो जन्म पंजीकरण कराने वालों की बाढ़ सी आ जाती है। नगर निगम के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के आंकड़ों पर गौर करें तो शहर के बच्चे अब घरों में ही पैदा होने लगे हैं। शहरी बच्चों की जन्मतिथि में काफी गोलमाल हैं और इसकी शिकायत भी मिल रही है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण अनुभाग में कार्यरत कर्मचारी इस बात को जानते भी हैं कि अभिभावक गलत व फर्जी ढंग से यह पंजीकरण करा रहे हैं। नाम नहीं छापने के अनुरोध पर एक कर्मचारी ने बताया कि अभिभावक अपने बच्चों की उम्र कम कराने के लिए यह खेल करते हैं। इसीलिए बच्चा पैदा अस्पताल में होता है, लेकिन उसका जन्म घर में दिखाते हैं। चूंकि घर में पैदा होने वाले बच्चों का स्थानीय पार्षद द्वारा सत्यापन कराकर उनके जन्म के पंजीकरण का प्रावधान है, इसी का अभिभावक फायदा उठाते हैं।
नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक, तीन माह में करीब 6,400 से अधिक का जन्म पंजीकरण हुआ है। उप रजिस्ट्रार जन्म मृत्यु कार्यालय के मुताबिक, जनवरी से लेकर मार्च 2019 के बीच करीब 7,800 लोगों ने जन्म पंजीकरण कराने के लिए आवेदन किया। औसतन देखा जाए तो हर महीने करीब 2,133 पंजीकरण हो रहे हैं। जबकि मृत्यु पंजीकरण के जनवरी से मार्च के बीच तीन हजार आवेदन आए, जिसमें से 2700 निस्तारित किए जा चुके हैं।
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नगर निगम की सीमा के भीतर करीब 270 अस्पताल ऐसे हैं जो ऑनलाइन नहीं हुए हैं। इनमें बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल, दीनदयाल, कबीरचौरा, चौकाघाट प्रसूति गृह आदि प्रमुख सरकारी अस्पताल भी शामिल हैं। नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के मुताबिक, इन सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्रसूति गृह को जन्म-मृत्यु पंजीकरण की ऑनलाइन फ ीडिंग नगर निगम की वेबसाइट पर करनी है, लेकिन मात्र 70 अस्पताल ही ऐसा कर रहे हैं। इस मामले में पूर्व नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने सभी अस्पतालों के लिए एक आदेश भी जारी किया था, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा।
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मार्च-अप्रैल में जब बच्चों के नामांकन का समय आता है तो जन्म पंजीकरण कराने वालों की बाढ़ सी आ जाती है। नगर निगम के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के आंकड़ों पर गौर करें तो शहर के बच्चे अब घरों में ही पैदा होने लगे हैं। शहरी बच्चों की जन्मतिथि में काफी गोलमाल हैं और इसकी शिकायत भी मिल रही है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण अनुभाग में कार्यरत कर्मचारी इस बात को जानते भी हैं कि अभिभावक गलत व फर्जी ढंग से यह पंजीकरण करा रहे हैं। नाम नहीं छापने के अनुरोध पर एक कर्मचारी ने बताया कि अभिभावक अपने बच्चों की उम्र कम कराने के लिए यह खेल करते हैं। इसीलिए बच्चा पैदा अस्पताल में होता है, लेकिन उसका जन्म घर में दिखाते हैं। चूंकि घर में पैदा होने वाले बच्चों का स्थानीय पार्षद द्वारा सत्यापन कराकर उनके जन्म के पंजीकरण का प्रावधान है, इसी का अभिभावक फायदा उठाते हैं।
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नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक, तीन माह में करीब 6,400 से अधिक का जन्म पंजीकरण हुआ है। उप रजिस्ट्रार जन्म मृत्यु कार्यालय के मुताबिक, जनवरी से लेकर मार्च 2019 के बीच करीब 7,800 लोगों ने जन्म पंजीकरण कराने के लिए आवेदन किया। औसतन देखा जाए तो हर महीने करीब 2,133 पंजीकरण हो रहे हैं। जबकि मृत्यु पंजीकरण के जनवरी से मार्च के बीच तीन हजार आवेदन आए, जिसमें से 2700 निस्तारित किए जा चुके हैं।
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नगर निगम की सीमा के भीतर करीब 270 अस्पताल ऐसे हैं जो ऑनलाइन नहीं हुए हैं। इनमें बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल, दीनदयाल, कबीरचौरा, चौकाघाट प्रसूति गृह आदि प्रमुख सरकारी अस्पताल भी शामिल हैं। नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के मुताबिक, इन सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्रसूति गृह को जन्म-मृत्यु पंजीकरण की ऑनलाइन फ ीडिंग नगर निगम की वेबसाइट पर करनी है, लेकिन मात्र 70 अस्पताल ही ऐसा कर रहे हैं। इस मामले में पूर्व नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने सभी अस्पतालों के लिए एक आदेश भी जारी किया था, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा।