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अविरलता के लिए भी छोड़ा जा सकेगा गंगा में पानी
Updated Mon, 15 Oct 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। गंगा के प्रवाह को निरंतर बनाए रखने के लिए अब जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के आदेश पर भी पानी छोड़ा जा सकेगा। इस आदेश का प्रकाशन भारत के राजपत्र में किया गया है। इस इस आदेश के बाद गंगा प्रेमी और पर्यावरणविद खुश हैं।
धार्मिक, पौराणिक महत्व रखने वाली और आस्था का प्रतीक नदी गंगा पर हरिद्वार, बिजनौर, नरौरा और कानपुर में कुल मिलाकर चार बैराज बनाए गए हैं। यहां से गंगा का पानी नहरों द्वारा मूलधारा से अलग कर दिया जाता है। प्रयाग में गंगा, युमना और इनकी सहायक नदियों जैसे यमुना, केन, बेतवा, चंबल आदि का पानी काशी की धारा में दिखता है। मगर गर्मियों में पानी काफी कम हो जाता है और धारा तल तक सीमित रह जाती है। इसमें मिलने वाला मलजल स्थिति को और विकट बना देता है। नदी प्रेमी और पर्यावरणविद लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। अब सरकार के इस आदेश से कि धारा को अवरिल बनाए रखने के लिए समय समय पर मूलधारा में पर्याप्त पानी छोड़ा जाएगा, इनमें खुशी की लहर है।
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धार्मिक, पौराणिक महत्व रखने वाली और आस्था का प्रतीक नदी गंगा पर हरिद्वार, बिजनौर, नरौरा और कानपुर में कुल मिलाकर चार बैराज बनाए गए हैं। यहां से गंगा का पानी नहरों द्वारा मूलधारा से अलग कर दिया जाता है। प्रयाग में गंगा, युमना और इनकी सहायक नदियों जैसे यमुना, केन, बेतवा, चंबल आदि का पानी काशी की धारा में दिखता है। मगर गर्मियों में पानी काफी कम हो जाता है और धारा तल तक सीमित रह जाती है। इसमें मिलने वाला मलजल स्थिति को और विकट बना देता है। नदी प्रेमी और पर्यावरणविद लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। अब सरकार के इस आदेश से कि धारा को अवरिल बनाए रखने के लिए समय समय पर मूलधारा में पर्याप्त पानी छोड़ा जाएगा, इनमें खुशी की लहर है।
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