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खरीद-बिक्री का विवरण नहीं किया दाखिल, 10 लाख जुर्माना0
Updated Tue, 10 Apr 2018 02:52 AM IST
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वाराणसी। भेलूपुर थाना क्षेत्र के महमूरगंज स्थित प्लास्टिक दरवाजा-खिड़की के निर्माता डार्क ओक लाइफ स्टाइल बीते तीन महीने से कच्चे माल की खरीद और तैयार उत्पाद की बिक्री का विवरण नहीं दाखिल कर रहे थे। सोमवार को यह खुलासा तब हुआ जब वाणिज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा ने फर्म के महमूरगंज स्थित कार्यालय और लहरतारा स्थित फैक्ट्री पर छापामारी की। इस गड़बड़ी के खुलासे पर डार्क ओक लाइफ स्टाल पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाकर वाणिज्य कर की टीम ने मौके पर ही वसूला। तीन घंटे की जांच के दौरान फर्म के सात रजिस्टर और 55 पर्चे भी जब्त किए गए।
डार्क ओक लाइफ स्टाइल फर्म द्वारा कच्चे माल की खरीद के साथ ही तैयार उत्पाद की बिक्री का सिलसिला जारी था। मगर, दिसंबर 2017 के बाद खरीद-बिक्री का विवरण फर्म की ओर से नहीं दाखिल किया जा रहा था। वाणिज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा के एडिशनल कमिश्नर केके वर्मा ने बताया कि इसे गंभीरता से लेते हुए ज्वाइंट कमिश्नर एसएन पांडेय के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई। साथ ही, डिप्टी कमिश्नर आनंद कुमार राय ने वाणिज्य कर अधिकारी चंदन पांडेय, संजय तिवारी व राघवेंद्र तिवारी के साथ फर्म के कार्यालय और फैक्ट्री में छापामारी की। जांच में व्यापारी के अभिलेखों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई। प्राथमिक तौर पर 55 लाख रुपये की कर चोरी मानते हुए 10 लाख जुर्माना जमा कराया गया है। वास्तविक कर चोरी का निर्धारण जब्त किए गए अभिलेखों की जांच के बाद किया जाएगा।
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डार्क ओक लाइफ स्टाइल फर्म द्वारा कच्चे माल की खरीद के साथ ही तैयार उत्पाद की बिक्री का सिलसिला जारी था। मगर, दिसंबर 2017 के बाद खरीद-बिक्री का विवरण फर्म की ओर से नहीं दाखिल किया जा रहा था। वाणिज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा के एडिशनल कमिश्नर केके वर्मा ने बताया कि इसे गंभीरता से लेते हुए ज्वाइंट कमिश्नर एसएन पांडेय के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई। साथ ही, डिप्टी कमिश्नर आनंद कुमार राय ने वाणिज्य कर अधिकारी चंदन पांडेय, संजय तिवारी व राघवेंद्र तिवारी के साथ फर्म के कार्यालय और फैक्ट्री में छापामारी की। जांच में व्यापारी के अभिलेखों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई। प्राथमिक तौर पर 55 लाख रुपये की कर चोरी मानते हुए 10 लाख जुर्माना जमा कराया गया है। वास्तविक कर चोरी का निर्धारण जब्त किए गए अभिलेखों की जांच के बाद किया जाएगा।
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