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इलाज करने वालों ने ही बढ़ाया मरीजों का दर्द

Thu, 05 Apr 2018 02:24 AM IST
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:24 AM IST
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इलाज करने वालों ने ही बढ़ाया मरीजों का दर्द
वाराणसी। बीमार होने पर लोग चिकित्सक के पास जाते हैं। उनको उम्मीद होती है कि यहां उनको सलाह और बीमारी दूर करने के लिए दवा भी दी जाएगी। महामना की बगिया में इसके उलट हो रहा है। यहां जिन पर इलाज की जिम्मेदारी है, वही चिकित्सक समाज सेवा और मानव धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। शपथ लेने के बावजूद चिकित्सक अपनी मांग मनवाने के लिए इस कदर दबाव पर उतर आए हैं कि बुधवार को गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
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यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल में डॉक्टरों और छात्रों से नोकझोंक-मारपीट हुई हो। आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं लेकिन जब भी जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो जाता है तो वे हड़ताल कर देते हैं। उनका मकसद केवल विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना होता है। हालांकि मंगलवार की घटना के लिए कौन दोषी है, यह तो जांच होने पर ही सामने आएगा। वैसे जूनियर डॉक्टरों ने छात्र को बेरहमी से पीटा है। छात्र के लंका थाने पर पहुंचने पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने भी कही। छात्र की तहरीर पर नामजद मुकदमा तो नहीं दर्ज हुआ है लेकिन कार्रवाई के डर से ही जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। उधर, आम दिनों में चार से पांच हजार मरीज जहां आते थे वहीं बुधवार को 2800 मरीजों ने ही ओपीडी में पंजीकरण कराया।
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