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गंगा तट पर सितार, पखावज और तबले का हुआ संगम
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वाराणसी। सोल ऑफ बनारस के तहत गंगा घाट पर शनिवार को संगीत की महफिल सजाई गई। पखावज और तबले के साथ पं. देवब्रत मिश्रा के सितार वादन ने दर्शकों को राग, ताल और संगीत की मधुर ध्वनियों का साक्षात्कार कराया। कार्यक्रम का आयोजन कला प्रकाश एवं आईसीसीआर के संयोजन में क्षितिज शृंखला के तहत किया गया था।
गुलेरिया कोठी में आयोजित क्षितिज शृंखला की पहली प्रस्तुति राग दरबारी से हुई। संगीत की लय को बिना विराम दिए ध्रुपद अंग की प्रस्तुति ने माहौल को संगीत के सुरों से मदमस्त कर दिया। ध्रुपद और ख्याल में मिश्रित फ्यूजन की प्रस्तुति सभी के मन को छू लेने वाली थी। सितार, पखावज और तबले की संगत ने सोल आफ बनारस की शाम को यादगार बना दिया।
इसके बाद ठुमरी याद पिया की आए..., पद्मविभूषण गिरिजा देवी की बंदिश बरसन लागी बदरिया रूमझूम के... ने तल्ख मौसम में हर किसी के अंतर्मन को भिगो दिया। कार्यक्रम का समापन पं. महादेव मिश्र की प्रसिद्ध बंदिश राग भैरवी में निबद्ध चलो हटो बनाओ ना बतिया काहे की झूठी...से हुआ। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कला प्रकाश के संयोजक अशोक कपूर ने किया।
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गुलेरिया कोठी में आयोजित क्षितिज शृंखला की पहली प्रस्तुति राग दरबारी से हुई। संगीत की लय को बिना विराम दिए ध्रुपद अंग की प्रस्तुति ने माहौल को संगीत के सुरों से मदमस्त कर दिया। ध्रुपद और ख्याल में मिश्रित फ्यूजन की प्रस्तुति सभी के मन को छू लेने वाली थी। सितार, पखावज और तबले की संगत ने सोल आफ बनारस की शाम को यादगार बना दिया।
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इसके बाद ठुमरी याद पिया की आए..., पद्मविभूषण गिरिजा देवी की बंदिश बरसन लागी बदरिया रूमझूम के... ने तल्ख मौसम में हर किसी के अंतर्मन को भिगो दिया। कार्यक्रम का समापन पं. महादेव मिश्र की प्रसिद्ध बंदिश राग भैरवी में निबद्ध चलो हटो बनाओ ना बतिया काहे की झूठी...से हुआ। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कला प्रकाश के संयोजक अशोक कपूर ने किया।
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