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तबले और शहनाई की धुन से दी भावांजलि
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वाराणसी। अस्सी घाट पर सुबह ए बनारस के तत्वावधान में शुक्रवार को भावार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को भावांजलि दी गई।
पहली प्रस्तुति में उस्ताद के भतीजे अली अब्बास और उनके पौत्र आफाक हैदर ने शहनाई वादन की जुगलबंदी प्रस्तुत की। दोनों कलाकारों ने अपने वादन में राग मधुवंती में तीनताल में निबद्ध गत बजाई, साथ ही रामधुन रघुपति राघव राजा राम की भावपूर्ण प्रस्तुति साकार की। अंत मे उस्ताद साहब की प्रिय कजरी की धुन बजाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। भावार्पण के अगली कड़ी में उस्ताद के सबसे छोटे पुत्र यश भारती उस्ताद नाजिम हुसैन ने स्वतंत्र तबला वादन प्रस्तुत किया। इसमें तीनताल में कई लय को साकार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ खां साहब के चित्र पर माल्यार्र्पण से किया। इस मौके पर डॉ रत्नेश वर्मा, लोक गायक विष्णु यादव, सुनील शुक्ला, श्याम केसरी, उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सीमा केशरी ने और धन्यवाद ज्ञापन अजय गुप्ताने किया।
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पहली प्रस्तुति में उस्ताद के भतीजे अली अब्बास और उनके पौत्र आफाक हैदर ने शहनाई वादन की जुगलबंदी प्रस्तुत की। दोनों कलाकारों ने अपने वादन में राग मधुवंती में तीनताल में निबद्ध गत बजाई, साथ ही रामधुन रघुपति राघव राजा राम की भावपूर्ण प्रस्तुति साकार की। अंत मे उस्ताद साहब की प्रिय कजरी की धुन बजाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। भावार्पण के अगली कड़ी में उस्ताद के सबसे छोटे पुत्र यश भारती उस्ताद नाजिम हुसैन ने स्वतंत्र तबला वादन प्रस्तुत किया। इसमें तीनताल में कई लय को साकार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ खां साहब के चित्र पर माल्यार्र्पण से किया। इस मौके पर डॉ रत्नेश वर्मा, लोक गायक विष्णु यादव, सुनील शुक्ला, श्याम केसरी, उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सीमा केशरी ने और धन्यवाद ज्ञापन अजय गुप्ताने किया।
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