बीएचयू में कृषि विज्ञान कांग्रेस का समापन: विज्ञानियों ने कहा- कृषि अपशिष्टों से ऊर्जा प्राप्ति की असीम संभावनाएं
बीएचयू में आयोजित 15वें कृषि विज्ञान कांग्रेस के अंतिम दिन डॉ. शेखर मंडे, प्रगतिशील किसान पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह और पद्मश्री रामशरण शर्मा समेत कई अन्य लोगों ने संबोधित किया। किसानों ने भी अपने अनुभवों को साझा किया।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में चल रहे पांच दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस में विद्वानों ने कृषि विकास, कृषि ऊर्जा आदि से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान नई तकनीक से खेती-किसानी करने के साथ ही समय-समय पर किसानों को जागरूक करते रहने का भी आह्वान वैज्ञानिकों ने किया।
मंगलवार को प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. शेखर मंडे ने कहा कि कृषि अपशिष्टों से ऊर्जा प्राप्ति की असीम संभावनाएं हैं। अपशिष्टों से ऊर्जा उत्पादन की टिकाऊ तकनीक विकसित करने की जरूरत है, जो कि किसानों को सुलभ हो और किसान उसे अपना सके।
स्वतंत्रता भवन में 15वें कृषि विज्ञान कांग्रेस के अंतिम दिन डॉ. शेखर मंडे ने कहा कि अपशिष्टों से मिलने वाली ऊर्जा को कृषि उत्पादन में प्रयोग करके कृषि ऊर्जा में बचत के साथ-साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा संभव है। यदि किसान ऊर्जा उत्पादक बन जाय तो न केवल अपनी आवश्यकता पूरी कर सकता है और उसे बेच कर आमदनी भी प्राप्त कर सकता है। इस दौरान किसानों ने भी अपने अनुभवों को साझा किया।
छोटे किसानों को बढानी चाहिए अपनी आय
प्रगतिशील किसान पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि उन्होंने अच्छे पौधों का चयन कर धान की तथा गेहूँ की प्रजातियां विकसित की गई। छोटे किसानों को खेती के साथ छोटे उद्योगों को अपनाकर अपनी आय बढ़ानी चाहिए। इसके अलावा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित बाराबंकी से पद्मश्री रामशरण शर्मा और करनाल से सुल्तान सिंह ने खेती की तकनीक से फायदों के बारे में विस्तार से बताया।
छात्रों के लिए हुई अभिभाषण प्रतियोगिता में जम्मू की डॉ. अम्बरीन हमदानी को पहला, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रद्योगिकी विश्वविद्यालय की पद्मिनी जोशी को दूसरा जबकि बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के जितिन के.आर. को तीसरा पुरस्कार मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने किया। इस दौरान प्रो. रमेश सिंह, प्रो. राकेश सिंह, प्रो.पीके सिंह आदि मौजूद रहे।