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डीरेका सहित सात उत्पादन इकाइयां होंगी निगमित
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वाराणसी। डीरेका (डीजल रेलइंजन कारखाना) सहित सात उत्पादन इकाइयां कार्पोरेट (निगमित) होंगी। रेलवे मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड को उत्पादन इकाइयों के निजीकरण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने व रेल संगठनों से बातचीत करने के लिए 100 दिन का समय दिया है। सबसे पहले मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली का ढांचा कार्पोरेट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। बोर्ड के सर्कुलर में सबसे नई उत्पादन इकाई रायबरेली कोच फैक्ट्री के निजीकरण की संभावना तलाशने का निर्देश दिया गया है। उत्पादन इकाइयों के अधिकारियों और कर्मचारियों में इस पत्र के बाद खलबली मच गई है।
रेलवे मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड के माध्यम से ‘100 डेज ऐक्शन प्लान’ सभी जोन और उत्पादन इकाइयों को भेजा है। इसके पैरा नंबर छह में रेल उत्पादन इकाइयों के निजीकरण की बात की गई है। सात प्रोडक्शन यूनिट चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स(सीएलडब्ल्यू), इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू), डीजल मॉडर्नाइजेशन वर्क्स (डीएमडब्ल्यू), व्हील एंड एक्सल प्लांट (बंगलुरु), रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) और मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) के निजीकरण के लिए रेलवे बोर्ड योजना तैयार करने में जुट गया है। प्रोडक्शन यूनियन में महाप्रबंधक की जगह सीईओ होंगे और यह उत्पादन इकाइयां व्यक्तिगत लाभ प्रतिशत के आधार पर काम करेंगी। रेलवे बोर्ड के सीएमडी को सीईओ रिपोर्ट करेंगे। रेलवे जल्द ही रेल संगठनों से सलाह लेने के साथ ही एक प्रोडक्शन यूनिट के लिए कैबिनेट नोट ला सकती है। इसके बाद फेज वाइज अन्य उत्पादन इकाइयों का भी निजीकरण किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के पत्र के बाद उत्पादन इकाइयों में अधिकारियों और कर्मचारियों में यूनिट और खुद के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। डीरेका उपमहाप्रबंधक नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि चर्चाएं उन्होंने भी सुनी हैं, लेकिन अभी तक बोर्ड से ऐसा कोई निर्देश नहीं मिला है।
भारतीय रेल के सभी उत्पादन इकाइयों का निगमीकरण करने के विरोध में डीरेका कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव विष्णु देव दूबे ने गुरुवार को महाप्रबंधक डीरेका रश्मि गोयल को ज्ञापन सौंपा। पत्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि निगमीकरण को लेकर सभी कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी। निगमीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।
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रेलवे मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड के माध्यम से ‘100 डेज ऐक्शन प्लान’ सभी जोन और उत्पादन इकाइयों को भेजा है। इसके पैरा नंबर छह में रेल उत्पादन इकाइयों के निजीकरण की बात की गई है। सात प्रोडक्शन यूनिट चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स(सीएलडब्ल्यू), इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू), डीजल मॉडर्नाइजेशन वर्क्स (डीएमडब्ल्यू), व्हील एंड एक्सल प्लांट (बंगलुरु), रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) और मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) के निजीकरण के लिए रेलवे बोर्ड योजना तैयार करने में जुट गया है। प्रोडक्शन यूनियन में महाप्रबंधक की जगह सीईओ होंगे और यह उत्पादन इकाइयां व्यक्तिगत लाभ प्रतिशत के आधार पर काम करेंगी। रेलवे बोर्ड के सीएमडी को सीईओ रिपोर्ट करेंगे। रेलवे जल्द ही रेल संगठनों से सलाह लेने के साथ ही एक प्रोडक्शन यूनिट के लिए कैबिनेट नोट ला सकती है। इसके बाद फेज वाइज अन्य उत्पादन इकाइयों का भी निजीकरण किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के पत्र के बाद उत्पादन इकाइयों में अधिकारियों और कर्मचारियों में यूनिट और खुद के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। डीरेका उपमहाप्रबंधक नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि चर्चाएं उन्होंने भी सुनी हैं, लेकिन अभी तक बोर्ड से ऐसा कोई निर्देश नहीं मिला है।
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भारतीय रेल के सभी उत्पादन इकाइयों का निगमीकरण करने के विरोध में डीरेका कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव विष्णु देव दूबे ने गुरुवार को महाप्रबंधक डीरेका रश्मि गोयल को ज्ञापन सौंपा। पत्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि निगमीकरण को लेकर सभी कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी। निगमीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।
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