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स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर विकसित होगा सीरगोवर्धन
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वाराणसी। संत रविदास की जन्मस्थली सीरगोवर्धन स्थित उनके मंदिर का विस्तार अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह होगा। प्रदेश सरकार की पहल पर जन्मस्थली को 100 एकड़ एरिया में विकसित किया जाएगा। शनिवार को जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने सत्संग हाल और लंगर हाल का शिलापट्ट लगवाकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। 15 हजार स्क्वायर फीट में दो मंजिला सत्संग हाल का निर्माण किया जाएगा। योजना की रूपरेखा जालंधर और वाराणसी के आर्किटेक्ट ने तैयार की है।
रविदास महाराज की जय के साथ ही संत रविदास की जन्मस्थली पर सत्संग हाल और लंगर हाल की आधारशिला रखी गई। संत सुरेंद्र दास की अगुवाई में मंदिर से जुड़े संतों ने संत रविदास के जयकारे के साथ सत्संग हाल की नींव में ईंट रखी। इसके साथ ही सत्संग हाल और लंगर हाल का निर्माण कार्य शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास जयंती पर सत्संग हाल व लंगर हाल का शिलान्यास किया था। फ रवरी माह में रविदास जयंती के मौके पर बनारस आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविदास जन्मस्थली को तीर्थ धरोहर के रूप में विकसित करने की बात कही थी।
मंदिर ट्रस्टी केएल सरोवा के अनुसार योजना के तहत 150 बेड का अस्पताल, आडिटोरियम, सत्संग हाल, संतों और सेवादारों के लिए आवास, वाचनालय, गोशाला एवं अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर मंदिर के चारों ओर श्रद्धालुओं के लिए 50 मीटर चौड़ा परिक्रमा पथ भी बनाने की योजना है।
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रविदास महाराज की जय के साथ ही संत रविदास की जन्मस्थली पर सत्संग हाल और लंगर हाल की आधारशिला रखी गई। संत सुरेंद्र दास की अगुवाई में मंदिर से जुड़े संतों ने संत रविदास के जयकारे के साथ सत्संग हाल की नींव में ईंट रखी। इसके साथ ही सत्संग हाल और लंगर हाल का निर्माण कार्य शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास जयंती पर सत्संग हाल व लंगर हाल का शिलान्यास किया था। फ रवरी माह में रविदास जयंती के मौके पर बनारस आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविदास जन्मस्थली को तीर्थ धरोहर के रूप में विकसित करने की बात कही थी।
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मंदिर ट्रस्टी केएल सरोवा के अनुसार योजना के तहत 150 बेड का अस्पताल, आडिटोरियम, सत्संग हाल, संतों और सेवादारों के लिए आवास, वाचनालय, गोशाला एवं अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर मंदिर के चारों ओर श्रद्धालुओं के लिए 50 मीटर चौड़ा परिक्रमा पथ भी बनाने की योजना है।
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