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ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन....

Mon, 29 Apr 2019 01:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2019 01:59 AM IST
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ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन....
वाराणसी। ‘ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन’ को जब भजन सम्राट अनूप जलोटा ने स्वर दिया तो संकट मोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा में रविवार को भक्ति की एक अलग धारा ही बह चली। ‘अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम्’ सहित कई भजनों की प्रस्तुती कर उन्होंने श्रोताओं का दिल जीत लिया। श्रोताओं ने हर-हर महादेव के जयघोष से उनका स्वागत किया।
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कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री मिलने के बाद पहली बार हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे प्रसिद्ध ड्रम वादक पंडित शिवमणि और उनके साथी मैंडोलिन वादक चेन्नई के यू राजेश ने ‘जय गणेश’ सुनाकर किया। दूसरी प्रस्तुति ओडिसी नृत्य की हुई, जिसमें रतिकांत महापात्र ने अपने शिष्य मंडली के साथ प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में भक्ति, भाव और भारतीयता का समावेश दिखा। इसके बाद रामचरितमानस के सबरी प्रसंग को नृत्य की भंगिमाओं के माध्यम से जीवंत किया।
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तीसरी प्रस्तुति पद्मभूषण डॉ. एल सुब्रमण्यम के पुत्र कलाकार अंबी सुब्रमण्यम ने कर्नाटकी शैली के वायलिन वादन से की। उन्होंने वादन का शुभारंभ राग बिलहरी से किया। दूसरी प्रस्तुति उन्होंने राग चारुकेशी में कर्नाटक गायन के पारंपरिक बंदिशों को वायलिन की धुन में उतारा। उनके साथ मृदंग पर वेंकटरमण मूर्ति और तबले पर पंडित तन्मय बोस ने कुशल संगत की।
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ंयाद पिया की आए’
संकट मोचन समारोह की पांचवी निशा में कलाकार कौशिकी चटर्जी ने राग चंद्रकौंस से एक ताल रूपक व तीन ताल में गायकी के पश्चात ठुमरी सुनाया, जिसके बोल थे ंयाद पिया की आए’। उनके साथ तबले पर संदीप बोस व अमिता मुखर्जी ने संगत किया। इसके बाद कोलकाता के सितार वादक पंडित कुशल दास ने अपनी कला का जादू बिखेरा। राग चारुकेशी में अलाप जोड़ झाला के पश्चात तीन ताल में गतकारी की। उनके साथ तबले पर पंडित कुमार बोस ने अपनी ख्याति के अनुरूप संगत देकर ऊंचाई प्रदान की। अगली प्रस्तुति में दिल्ली से पंडित हरीश तिवारी ने अपने गायन से अमर गायक पंडित भीमसेन जोशी की याद दिला दी। अंतिम प्रस्तुति में मुंबई से पधारी नेहा बनर्जी ने अपने सहयोगी कलाकारों के साथ कथक नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन पंडित हरिराम द्विवेदी, प्रतिमा सिन्हा व सौरव चक्रवर्ती ने किया।
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