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37 सौ ने किया ऋणमाफी के लिए दावा
Updated Thu, 19 Apr 2018 12:56 AM IST
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ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी किसान ऋणमोचन योजना के लिए साढ़े तीन हजार से ज्यादा किसानों ने दावा किया है। इसके लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर 3767 किसानों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। विभाग की ओर से सत्यापन के लिए तहसीलों को किसानों की सूची भेज दी गई है। सत्यापन के बाद पात्र किसानों को ऋणमाफी का लाभ दिया जाएगा। 29 अप्रैल को कृषि विभाग शासन से बजट की डिमांड करेगा।
2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान कर्जमाफी की घोषणा करने वाली भाजपा ने सूबे में सरकार बनाने के बाद इसको प्रभावी किया। योजना के लिए जिले में करीब 22 हजार किसान चिन्हित हुए। तीन चरणों में सत्यापन के बाद 12 हजार किसान पात्रता से बाहर हो गए और करीब10 हजार किसानों का एक-एक लाख का ऋण माफ किया गया। जिस पर करीब 60 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई। इस दौराल लेखपालों की मनमानी से पात्र होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसान लाभ से वंचित रह गए। इसका विरोध प्रदेश स्तर पर होने लगा तो शासन ने ऐसे किसानों को लाभान्वित करने के लिए दोबारा कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन मांगे। 15 अप्रैल तक 3767 किसानों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि किसानों की शिकायतों को तहसील भेजा गया है। वहां से सत्यापन पूर्ण होने के बाद पात्र किसानों को ऋणमाफी का लाभ देने के लिए 29 अप्रैल को डिमांड की जाएगी।
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2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान कर्जमाफी की घोषणा करने वाली भाजपा ने सूबे में सरकार बनाने के बाद इसको प्रभावी किया। योजना के लिए जिले में करीब 22 हजार किसान चिन्हित हुए। तीन चरणों में सत्यापन के बाद 12 हजार किसान पात्रता से बाहर हो गए और करीब10 हजार किसानों का एक-एक लाख का ऋण माफ किया गया। जिस पर करीब 60 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई। इस दौराल लेखपालों की मनमानी से पात्र होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसान लाभ से वंचित रह गए। इसका विरोध प्रदेश स्तर पर होने लगा तो शासन ने ऐसे किसानों को लाभान्वित करने के लिए दोबारा कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन मांगे। 15 अप्रैल तक 3767 किसानों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि किसानों की शिकायतों को तहसील भेजा गया है। वहां से सत्यापन पूर्ण होने के बाद पात्र किसानों को ऋणमाफी का लाभ देने के लिए 29 अप्रैल को डिमांड की जाएगी।
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