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उमंग फार्मेसी के बचाव में उतरा बीएचयू प्रशासन
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:27 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में संचालित दवा की दुकान ‘उमंग फार्मेसी’ पर प्रशासन की छापेमारी के बाद अस्पताल प्रशासन उसके बचाव में उतर गया है। अस्पताल से मिलने वाली निऱ्शुल्क दवाएं बेचने की कमिश्नर से शिकायत की जांच के लिए प्रशासन ने यह छापेमारी की थी। बीएचयू प्रशासन ने इसे दवा माफियाओं की साजिश करार दिया है। उसका कहना है कि फार्मेसी को अस्पताल की ओर से कोई दवा नहीं दी जाती है बल्कि एक कंपनी के माध्यम से वहां कम दाम में दवाएं मरीजों के हित में उपलब्ध कराई जाती हैं।
पिछले दिनों कमिश्नर के पास शिकायत पहुंची थी कि उमंग फार्मेसी से ऐसी दवा बेची जा रही है जो अस्पताल से निऱ्शुल्क दी जाती है। बुधवार को कमिश्नर के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ के साथ एडीएम सिटी जितेंद्र मोहन सिंह ने फार्मेसी पर छापा मारा। दवाओं के सैंपल और कागजात की जांच की थी। विश्वविद्यालय प्रवक्ता राजेश सिंह ने गुरुवार को प्रेस को जारी बयान में बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से कभी भी मेग्नामाइसीन इन्जेक्शन समेत अन्य कोई भी दवा उमंग फ ार्मेसी को विक्त्रस्य करने के लिए नहीं दी जाती है।
जिस दवा की शिकायत की गई है, उसे कंपनी ने ही उमंग फ ार्मेसी को उपलब्ध कराया है। कंपनी कम दाम में विशेष योजना के तहत चिकित्सालयों में संचालित फ ार्मेसी के माध्यम से दवाएं विक्त्रस्य करती है। लिहाजा, उस पर हास्पिटल सप्लाई लिखा था। दवा और कागजात की छानबीन के बाद एडीएम सिटी ने भी प्रथम दृष्टया यहां किसी तरह की अनियमितता नहीं पाई।
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पिछले दिनों कमिश्नर के पास शिकायत पहुंची थी कि उमंग फार्मेसी से ऐसी दवा बेची जा रही है जो अस्पताल से निऱ्शुल्क दी जाती है। बुधवार को कमिश्नर के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ के साथ एडीएम सिटी जितेंद्र मोहन सिंह ने फार्मेसी पर छापा मारा। दवाओं के सैंपल और कागजात की जांच की थी। विश्वविद्यालय प्रवक्ता राजेश सिंह ने गुरुवार को प्रेस को जारी बयान में बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से कभी भी मेग्नामाइसीन इन्जेक्शन समेत अन्य कोई भी दवा उमंग फ ार्मेसी को विक्त्रस्य करने के लिए नहीं दी जाती है।
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जिस दवा की शिकायत की गई है, उसे कंपनी ने ही उमंग फ ार्मेसी को उपलब्ध कराया है। कंपनी कम दाम में विशेष योजना के तहत चिकित्सालयों में संचालित फ ार्मेसी के माध्यम से दवाएं विक्त्रस्य करती है। लिहाजा, उस पर हास्पिटल सप्लाई लिखा था। दवा और कागजात की छानबीन के बाद एडीएम सिटी ने भी प्रथम दृष्टया यहां किसी तरह की अनियमितता नहीं पाई।
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