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यूपी: भदोही में पांच साल में स्कूली वाहनों की 15 दुर्घटनाएं, फिर भी जिम्मेदार बेपरवाह
Sun, 13 Jan 2019 01:28 PM IST
utpal utpal
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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Published by: utpal utpal
Updated Sun, 13 Jan 2019 01:28 PM IST
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आग लगने के बाद स्कूली वैन की हालत
- फोटो : amar ujala
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यूपी के भदोही जिले के लखनो गांव में शनिवार सुबह स्कूली वैन की आग में 19 बच्चों के झुलसने की घटना ने सबको हिलाकर रख दिया। इस घटना से 25 जुलाई 2016 में मानवरहित कैयरमऊ रेलवे क्रॉसिंग हादसे की याद ताजा कर दी।
पिछले पांच साल में करीब 15 से अधिक स्कूल वाहनों से जुड़ी छोटी-बड़ी घटनाएं हुईं हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाने से लोगों में काफी गुस्सा दिखा। बेहतर शिक्षा देने के बजाए प्रबंध तंत्र अभिभावकों से मोटी कमाई करते हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं रहते। जिले में यह पहली घटना नहीं है।
पांच साल में करीब 15 से अधिक घटनाएं हुईं, जिनमें 25 जुलाई 2016 को कैयरमऊ ट्रेन हादसा सबसे ज्यादा हृदय विदारक था। उस घटना में स्कूली वैन में सवार आठ बच्चों की जान चली गई थी। उसके बाद कुछ दिनों तक प्रशासन सक्रिय रहा, पर उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया।
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हफ्तेभर पहले सुरियावां में स्कूली वाहन पलट गया था। हालांकि सभी बच्चे सुरक्षित बच गए। इसी तरह अभोली के गुआली गांव में बच्चों को लेकर जा रहा ऑटो नहर में पलट गया था। उसमें भी सभी बच्चे बाल-बाल बच गए। हालांकि उप संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों में कैयरमऊ की एकमात्र घटना ही दर्ज है।
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पिछले पांच साल में करीब 15 से अधिक स्कूल वाहनों से जुड़ी छोटी-बड़ी घटनाएं हुईं हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाने से लोगों में काफी गुस्सा दिखा। बेहतर शिक्षा देने के बजाए प्रबंध तंत्र अभिभावकों से मोटी कमाई करते हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं रहते। जिले में यह पहली घटना नहीं है।
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पांच साल में करीब 15 से अधिक घटनाएं हुईं, जिनमें 25 जुलाई 2016 को कैयरमऊ ट्रेन हादसा सबसे ज्यादा हृदय विदारक था। उस घटना में स्कूली वैन में सवार आठ बच्चों की जान चली गई थी। उसके बाद कुछ दिनों तक प्रशासन सक्रिय रहा, पर उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया।
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हफ्तेभर पहले सुरियावां में स्कूली वाहन पलट गया था। हालांकि सभी बच्चे सुरक्षित बच गए। इसी तरह अभोली के गुआली गांव में बच्चों को लेकर जा रहा ऑटो नहर में पलट गया था। उसमें भी सभी बच्चे बाल-बाल बच गए। हालांकि उप संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों में कैयरमऊ की एकमात्र घटना ही दर्ज है।
घटनाओं के बाद भी सक्रिय नहीं होता परिवहन विभाग
स्कूल वाहनों से जुड़ी घटनाओं के बाद भी परिवहन विभाग सक्रिय नहीं होता, जिससे संचालक भी मनमानी करने से बाज नहीं आते। अभोली के गुआली में अब भी बच्चों को ऑटो से ले जाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि 15 से 16 साल उम्र के अप्रशिक्षित चालकों के हाथ में बच्चों की जान होती है।
पैसे बचाने के चक्कर में वाहन मालिक वाहनों को सिलेंडर से ही चलाते हैं। सीएनजी के बजाए वह घरेलू गैस का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी अमूमन जांच नहीं होती। पिछले तीन वर्षों के दौरान रसोई गैस सिलेंडर से चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का कोई ब्योरा परिवहन विभाग के पास नहीं है।
पैसे बचाने के चक्कर में वाहन मालिक वाहनों को सिलेंडर से ही चलाते हैं। सीएनजी के बजाए वह घरेलू गैस का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी अमूमन जांच नहीं होती। पिछले तीन वर्षों के दौरान रसोई गैस सिलेंडर से चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का कोई ब्योरा परिवहन विभाग के पास नहीं है।