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10 करोड़ से चलेंगे धर्म संसद के 108 विभाग
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वाराणसी। देश में अनेक विचारधाराओं के लोग स्वयं को हिंदू के रूप में प्रस्तुत कर सनातनी जनता को छल रहे हैं। ऐसे में मूल सनातन धर्मियों की अलग पहचान अत्यंत आवश्यक है। ताकि देखने से ही पता चले कि सामने वाला सनातनी हिंदू है या गैर हिंदू। यह बातें विद्यामठ में धर्मासदों को संबोधित करते हुए मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं। इस दौरान 108 विभागों पर 10 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय भी लिया गया।
विद्यामठ में आयोजित धर्मासदों की बैठक के दूसरे दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने भी अलग पहचान की आवश्यकता को समय समय पर अनुभव किया था। इसी परिणाम है कि जब हम किसी के माथे पर तिलक देखते हैं तो हमें पता चल जाता है कि वह व्यक्ति किस संप्रदाय या विचारधारा से जुड़ा है। स्मार्त जहां त्रिपुंड लगाते हैं, वहीं वैष्णव उर्ध्व पुंड लगाते हैं। रामानुज संप्रदाय के अनुयायी शरीर पर मुद्र की अमिट छाप लगाते हैं।
बैठक में धर्मासदों ने शिखा, जनेऊ, तिलक, कंठी माला, लाकेट, हाथ का कलावा, साफा, कुंडल, रुद्राक्ष या तुलसी युक्त ब्रेसलेट आदि अनेक चीजों के बारे में सुझाव दिया। बैठक में ऑनलाइन अभियान आरंभ करने का भी निर्णय लिया गया और मुंबई के मीडिया साइकोलॉजिस्ट दिव्य रत्न को इसके लिए एक एप बनवाने का दायित्व सौंपा गया। महंत राजीव लोचन दास को धर्म संसद का संगठन सेवा प्रमुख नियुक्त किया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि प्रतिवर्ष दो माह के लिए भारत परिक्रमा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह यात्रा कश्मीर से आरंभ होकर कन्या कुमारी तक जाएगी।
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विद्यामठ में आयोजित धर्मासदों की बैठक के दूसरे दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने भी अलग पहचान की आवश्यकता को समय समय पर अनुभव किया था। इसी परिणाम है कि जब हम किसी के माथे पर तिलक देखते हैं तो हमें पता चल जाता है कि वह व्यक्ति किस संप्रदाय या विचारधारा से जुड़ा है। स्मार्त जहां त्रिपुंड लगाते हैं, वहीं वैष्णव उर्ध्व पुंड लगाते हैं। रामानुज संप्रदाय के अनुयायी शरीर पर मुद्र की अमिट छाप लगाते हैं।
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बैठक में धर्मासदों ने शिखा, जनेऊ, तिलक, कंठी माला, लाकेट, हाथ का कलावा, साफा, कुंडल, रुद्राक्ष या तुलसी युक्त ब्रेसलेट आदि अनेक चीजों के बारे में सुझाव दिया। बैठक में ऑनलाइन अभियान आरंभ करने का भी निर्णय लिया गया और मुंबई के मीडिया साइकोलॉजिस्ट दिव्य रत्न को इसके लिए एक एप बनवाने का दायित्व सौंपा गया। महंत राजीव लोचन दास को धर्म संसद का संगठन सेवा प्रमुख नियुक्त किया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि प्रतिवर्ष दो माह के लिए भारत परिक्रमा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह यात्रा कश्मीर से आरंभ होकर कन्या कुमारी तक जाएगी।
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