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राजस्थानी पगड़ी पहन भक्तों संग होली खेलेंगे बाबा विश्वनाथ
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वाराणसी। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ इस बार अलग पहनावे में दिखेंगे। बाबा के लिए राजस्थानी टोपी के साथ ही गुजराती खादी का वस्त्र बनवाया गया है, जिसे पहनकर वे माता गौरा का गौना करवाने जाएंगे। गौने में माता पार्वती केसरिया रंग की बनारसी साड़ी पहनेंगी। इस दौरान बाबा विश्वनाथ भक्तों संग होली भी खेलेंगे। होली खेलने के लिए मथुरा से अबीर गुलाल मंगाया गया है।
विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर 354 वर्षों से लगातार रंगभरी एकादशी के दिन पालकी में विराजमान बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती और गणेश की प्रतिमाओं के राजसी स्वरूप का दर्शन होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ होली खेलते हैं। रंगभरी एकादशी से काशी में होली खेलने की परंपरा है।
ये रहेगी व्यवस्था
रंगभरी एकादशी पर शाम के समय बाबा की पालकी उठने से पहले सगुन के गीत गाए जाएंगे। वहीं भक्त बाबा के स्वरूपों संग भभूत की होली खेलेंगे। 108 डमरुओं संग शंखनाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच शोभायात्रा महंत आवास से विश्वनाथ मंदिर तक जाएगी। इसमें हजारों की संख्या में भक्त अबीर गुलाल उड़ाते चलेंगे। गर्भगृह में प्रतिमाएं स्थापित कर होली खेलने के बाद विशेष सप्तर्षि आरती होगी। महंत कुलपति तिवारी के अनुसार गौने की बारात में भक्तों पर उड़ाई जाने वाली फूलों से तैयार अबीर में चंदन का चूर्ण भी मिलाया जाएगा।
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विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर 354 वर्षों से लगातार रंगभरी एकादशी के दिन पालकी में विराजमान बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती और गणेश की प्रतिमाओं के राजसी स्वरूप का दर्शन होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ होली खेलते हैं। रंगभरी एकादशी से काशी में होली खेलने की परंपरा है।
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ये रहेगी व्यवस्था
रंगभरी एकादशी पर शाम के समय बाबा की पालकी उठने से पहले सगुन के गीत गाए जाएंगे। वहीं भक्त बाबा के स्वरूपों संग भभूत की होली खेलेंगे। 108 डमरुओं संग शंखनाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच शोभायात्रा महंत आवास से विश्वनाथ मंदिर तक जाएगी। इसमें हजारों की संख्या में भक्त अबीर गुलाल उड़ाते चलेंगे। गर्भगृह में प्रतिमाएं स्थापित कर होली खेलने के बाद विशेष सप्तर्षि आरती होगी। महंत कुलपति तिवारी के अनुसार गौने की बारात में भक्तों पर उड़ाई जाने वाली फूलों से तैयार अबीर में चंदन का चूर्ण भी मिलाया जाएगा।
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