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भदोही विस्फोट- तीन-CHANDAULI
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ज्ञानपुर (भदोही)। सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला खुफिया तंत्र जिले में पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। केंद्रीय एजेंसी आईबी से लेकर प्रदेश की एलआईयू तक निष्क्रिय बनी हुई हैं। पूरा खुफिया तंत्र पासपोर्ट के अभिलेखों की जांच से लेकर धरना और प्रदर्शन तक सिमट कर रह गया है। बस्ती में बारुद का इतना बड़ा जखीरा कहां से आया किसी एजेंसी को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। विस्फोट में 11 लोगों की मौत के बाद यह सवाल उठने लगा है कि चार सालों में बड़े विस्फोट की पांच घटनाएं हुई पर एजेंसियों को कभी कोई इनपुट क्यों नहीं मिल सका।
जिले की शांति व्यवस्था विरोधी गतिविधियों पर नजर रखने में एलआईयू और आईबी जैसी एजेंसियों के नेटवर्क कमजोर साबित हो रहे हैं। जिले में पहले भी हुई कई घटनाएं हुई जिसमें यह तंत्र पूरी तरह फेल नजर आया। चाहे वह पांच साल पहले भदोही में दंगा भड़कने की बात हो या विस्फोट की अन्य घटनाएं। चार सालों में विस्फोट की पांच बड़ी घटनाएं हुई पर एजेंसियां विस्फोटकों के अवैध भंडारण का पता लगाने में कभी सफल नहीं हो पाईं। हालत यह है कि एलआईयू कर्मी पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के अभिलेखों की जांच तक अपना दायरा सिमटा चुके हैं, वहीं आईबी आदि भी धरना-प्रदर्शन से लेकर पुतला दहन की घटनाओं को ही फोकस करती है। चौरी के रोटहां में शनिवार को भारी मात्रा में विस्फोटक से कई मकान जमींदोज होने के बाद खुफिया एजेंसियों की तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिले की शांति व्यवस्था विरोधी गतिविधियों पर नजर रखने में एलआईयू और आईबी जैसी एजेंसियों के नेटवर्क कमजोर साबित हो रहे हैं। जिले में पहले भी हुई कई घटनाएं हुई जिसमें यह तंत्र पूरी तरह फेल नजर आया। चाहे वह पांच साल पहले भदोही में दंगा भड़कने की बात हो या विस्फोट की अन्य घटनाएं। चार सालों में विस्फोट की पांच बड़ी घटनाएं हुई पर एजेंसियां विस्फोटकों के अवैध भंडारण का पता लगाने में कभी सफल नहीं हो पाईं। हालत यह है कि एलआईयू कर्मी पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के अभिलेखों की जांच तक अपना दायरा सिमटा चुके हैं, वहीं आईबी आदि भी धरना-प्रदर्शन से लेकर पुतला दहन की घटनाओं को ही फोकस करती है। चौरी के रोटहां में शनिवार को भारी मात्रा में विस्फोटक से कई मकान जमींदोज होने के बाद खुफिया एजेंसियों की तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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