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‘हमारे राम के बदले पाकिस्तान के राक्षस चाहिए’
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वाराणसी। रमेश की शहादत की खबर मिली तो शुक्रवार की रात परिजनों ने आंखों में ही काट दी। पत्नी रेनू और मां राजमती देवी गांव की महिलाओं के बीच पुआल पर बैठ कर बिलखती रहीं। पिता श्याम नारायण गुमसुम बैठे थे। सभी रमेश से लिपट कर जी भर रोना चाह रहे थे। मां और दादी का बिलखना देख मासूम आयुष भी रोने लगता तो बुआ उसे शांत कराने की कोशिश करतीं। गांव के कई घरों में भी चूल्हे नहीं जले।
शहीद रमेश का पार्थिव शरीर लेकर शुक्रवार सुबह सीआरपीएफ के जवान पहुंचे तो रेनू अचेत हो गई। पानी के छींटे मारने पर होश आया तो कहने लगीं कि अब हम आपन दुखवा केके बताइब हो... केसे का कहब... कइसे अउर केके सहारे ई पहाड़ जइसन जिंदगी कटी... कइसे बाबू के संभालब... कइसे घर देखब... हे भगवान तू ई का कइला हो...। रेनू ने कई बार चीख-चीख कर कहा कि हमारे राम के बदले पाकिस्तान के राक्षस चाहिए। दोषी बचने न पाएं। रेनू की वेदना देख मौजूद ग्रामीणों ने एक वीर सपूत के बदले सौ आतंकी चाहिए का नारा लगाने लगे।
शहीद के बेटे ने लहराया तिरंगा
चौबेपुर। शहीद रमेश का पार्थिव शरीर जब दरवाजे के सामने रखा गया तो एक युवक ने उनके बेटे आयुष को गोद में लेकर पिता के अंतिम दर्शन के लिए चौकी पर खड़ा कर दिया। इसी बीच मासूम ने तिरंगा हाथ में लिया और उसे उत्साह के साथ लहराया। यह देख मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। लोगों ने कहा कि पिता की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। बेटे ने तिरंगा लहरा कर भारत का मान हमेशा ऊंचा रखने का संकेत दिया है।
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दलों से बड़ा दिखा देश का लाल
चौबेपुर। शहीद रमेश को श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा सहित अन्य सभी राजनीतिक दलों के जिले, तहसीलों और ब्लाक स्तरीय नेता एक-दूसरे से कंधे से कंधा मिलाकर शवयात्रा में साथ चलते नजर आए। भारत मां की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए घाट की ओर जा रहे नेताओं को देख ग्रामीणों ने कहा कि हमारी माटी का लाल दलों से बड़ा दिखा। नेताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि वैचारिक मतभेद भले ही हों लेकिन देश के लिए सभी एकजुट हैं। उधर, शहीद रमेश के अंतिम संस्कार के बाद उनके परिजनों को घर जाने के लिए सीओ पिंडरा सुरेंद्र और थानाध्यक्ष चौबेपुर विश्वनाथ प्रताप सिंह ने वाहनों की व्यवस्था की। जो लोग गांव और आसपास के गांवों से आए थे, उनके वापस जाने के लिए बस की व्यवस्था की गई।
बंद रहे इलाके के बाजार
चिरईगांव। शहीद रमेश यादव के सम्मान में जाल्हूपुर, भगतुआं सहित आसपास के बाजार बंद रहे और दुकानदारों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीन जवानों का पार्थिव शरीर आया था मोहनसराय तक
प्रयागराज से सड़क मार्ग से तीन शहीदों का पार्थिव शरीर मोहनसराय तक आया था। शहीद अवधेश कुमार यादव का पार्थिव शरीर चंदौली और शहीद विजय कुमार मौर्य का पार्थिव शरीर देवरिया जिला स्थित उनके घर के लिए भेजा गया। सुबह का समय होने के बावजूद चांदपुर, पहड़िया, आशापुर, सारनाथ सहित कई स्थान पर लोग सड़क किनारे खड़े रहे और शहीदों को लेकर जा रहे वाहन को देखते ही भारत माता की जय के नारे लगाए।
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शहीद रमेश का पार्थिव शरीर लेकर शुक्रवार सुबह सीआरपीएफ के जवान पहुंचे तो रेनू अचेत हो गई। पानी के छींटे मारने पर होश आया तो कहने लगीं कि अब हम आपन दुखवा केके बताइब हो... केसे का कहब... कइसे अउर केके सहारे ई पहाड़ जइसन जिंदगी कटी... कइसे बाबू के संभालब... कइसे घर देखब... हे भगवान तू ई का कइला हो...। रेनू ने कई बार चीख-चीख कर कहा कि हमारे राम के बदले पाकिस्तान के राक्षस चाहिए। दोषी बचने न पाएं। रेनू की वेदना देख मौजूद ग्रामीणों ने एक वीर सपूत के बदले सौ आतंकी चाहिए का नारा लगाने लगे।
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शहीद के बेटे ने लहराया तिरंगा
चौबेपुर। शहीद रमेश का पार्थिव शरीर जब दरवाजे के सामने रखा गया तो एक युवक ने उनके बेटे आयुष को गोद में लेकर पिता के अंतिम दर्शन के लिए चौकी पर खड़ा कर दिया। इसी बीच मासूम ने तिरंगा हाथ में लिया और उसे उत्साह के साथ लहराया। यह देख मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। लोगों ने कहा कि पिता की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। बेटे ने तिरंगा लहरा कर भारत का मान हमेशा ऊंचा रखने का संकेत दिया है।
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दलों से बड़ा दिखा देश का लाल
चौबेपुर। शहीद रमेश को श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा सहित अन्य सभी राजनीतिक दलों के जिले, तहसीलों और ब्लाक स्तरीय नेता एक-दूसरे से कंधे से कंधा मिलाकर शवयात्रा में साथ चलते नजर आए। भारत मां की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए घाट की ओर जा रहे नेताओं को देख ग्रामीणों ने कहा कि हमारी माटी का लाल दलों से बड़ा दिखा। नेताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि वैचारिक मतभेद भले ही हों लेकिन देश के लिए सभी एकजुट हैं। उधर, शहीद रमेश के अंतिम संस्कार के बाद उनके परिजनों को घर जाने के लिए सीओ पिंडरा सुरेंद्र और थानाध्यक्ष चौबेपुर विश्वनाथ प्रताप सिंह ने वाहनों की व्यवस्था की। जो लोग गांव और आसपास के गांवों से आए थे, उनके वापस जाने के लिए बस की व्यवस्था की गई।
बंद रहे इलाके के बाजार
चिरईगांव। शहीद रमेश यादव के सम्मान में जाल्हूपुर, भगतुआं सहित आसपास के बाजार बंद रहे और दुकानदारों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीन जवानों का पार्थिव शरीर आया था मोहनसराय तक
प्रयागराज से सड़क मार्ग से तीन शहीदों का पार्थिव शरीर मोहनसराय तक आया था। शहीद अवधेश कुमार यादव का पार्थिव शरीर चंदौली और शहीद विजय कुमार मौर्य का पार्थिव शरीर देवरिया जिला स्थित उनके घर के लिए भेजा गया। सुबह का समय होने के बावजूद चांदपुर, पहड़िया, आशापुर, सारनाथ सहित कई स्थान पर लोग सड़क किनारे खड़े रहे और शहीदों को लेकर जा रहे वाहन को देखते ही भारत माता की जय के नारे लगाए।