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भूखे पुजारी के स्वप्न में आए, बन गया धाम
Updated Mon, 26 Jun 2017 02:03 AM IST
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वाराणसी। काशी में रथयात्रा मेले का इतिहास शताब्दियों पुराना है। मेला कब और कैसे शुरू हुआ इसे लेकर अलग-अलग लोक मान्यताएं भी हैं। करीब 317 वर्ष पहले जगन्नाथपुरी पुरी मंदिर से आए पुजारी ने ही अस्सी घाट पर जगन्नाथ मंदिर की स्थापना की थी।
कहा जाता है कि 1690 में पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पुजारी बालक दास ब्रह्मचारी वहां के तत्कालीन राजा इंद्रद्युम्न के व्यवहार से नाराज होकर काशी आ गए थे। पुरी के ही तीर्थ पुरोहित सत्यनारायण जी बताते हैं कि बाबा बालक दास भगवान को लगे भोग का ही प्रसाद ग्रहण करते थे। एक बार भादों में गंगा में बाढ़ आने की वजह से पुरी से प्रसाद पहुंचाने में पखवारे भर से अधिक का विलंब हो गया। इतने दिन पुजारी भूखे ही भगवान का ध्यान करते रहे। तब भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में उनको प्रेरणा दी कि वह काशी में ही मंदिर की स्थापना कर भोग लगाना शुरू करें। इसके बाद बालक दास ने महाराष्ट्र की एक रियासत के राजा की पहल पर भगवान जगन्नाथ के मंदिर का निर्माण कराया।
वर्ष 1700 से उन्होंने काशी में रथयात्रा मेला शुरू कराया। इसके अलावा इस मेले के बारे में एक और प्रसंग मिलता है। कहा जाता है कि वर्ष 1790 में पुरी मंदिर से काशी आए स्वामी तेजोनिधि ने गंगा तट पर रहकर जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। जनश्रुतियों के अनुसार एक बार तेजोनिधि के स्वप्न में भगवान जगन्नाथ आए और पुरी मंदिर के स्वामी रहे तेजोनिधि से कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी में भी उनकी पूजा होनी चाहिए। इसके बाद स्वामी तेजोनिधि ने स्थानीय भक्तों के सहयोग से रथयात्रा की शुरुआत की।
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कहा जाता है कि 1690 में पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पुजारी बालक दास ब्रह्मचारी वहां के तत्कालीन राजा इंद्रद्युम्न के व्यवहार से नाराज होकर काशी आ गए थे। पुरी के ही तीर्थ पुरोहित सत्यनारायण जी बताते हैं कि बाबा बालक दास भगवान को लगे भोग का ही प्रसाद ग्रहण करते थे। एक बार भादों में गंगा में बाढ़ आने की वजह से पुरी से प्रसाद पहुंचाने में पखवारे भर से अधिक का विलंब हो गया। इतने दिन पुजारी भूखे ही भगवान का ध्यान करते रहे। तब भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में उनको प्रेरणा दी कि वह काशी में ही मंदिर की स्थापना कर भोग लगाना शुरू करें। इसके बाद बालक दास ने महाराष्ट्र की एक रियासत के राजा की पहल पर भगवान जगन्नाथ के मंदिर का निर्माण कराया।
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वर्ष 1700 से उन्होंने काशी में रथयात्रा मेला शुरू कराया। इसके अलावा इस मेले के बारे में एक और प्रसंग मिलता है। कहा जाता है कि वर्ष 1790 में पुरी मंदिर से काशी आए स्वामी तेजोनिधि ने गंगा तट पर रहकर जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। जनश्रुतियों के अनुसार एक बार तेजोनिधि के स्वप्न में भगवान जगन्नाथ आए और पुरी मंदिर के स्वामी रहे तेजोनिधि से कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी में भी उनकी पूजा होनी चाहिए। इसके बाद स्वामी तेजोनिधि ने स्थानीय भक्तों के सहयोग से रथयात्रा की शुरुआत की।
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