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जिला पंचायत की जांच का जिन्न फिर निकला
Updated Wed, 11 Jul 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। जिला पंचायत में करोड़ों के घोटाले के मामले की जांच अब फिर शुरू हो गई है। सीडीओ गौरांग राठी ने जिला पंचायत के प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी से 2016-17 एवं 2017-18 में कराए गए टेंडर के साथ-साथ 2016-17 व 17-18 में जिला पंचायत से हुए कार्यों की पत्रावली के साथ 2016-17 एवं 17-18 में हुए कार्यों के लिए मिली धनराशि और इसके लिए किए गए भुगतान की राशि से संबंधित पत्रावली तलब की है।
नए सिरे से जांच शुरू होने के बाद जिला पंचायत में फिर खलबली मच गई है। तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने तत्कालीन सीडीओ सुनील कुमार वर्मा को जांच सौंपी थी लेकिन तब सीडीओ ने यह कहकर जांच लौटा दी थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मुझे जांच करने का अधिकार नहीं है। सवाल यह है कि ऐसे में फिर सीडीओ द्वारा जांच कैसे की जाएगी।
इसके पूर्व तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी सुधीर कुमार एवं अभियंता अखिलेश कुमार ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों की जांच के क्रम में कागजों पर हुए करोड़ों के निर्माण कार्यों के साथ सोलर लाइट एवं साइन बोर्ड घोटाले को उजागर करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर, अभियंता अरविंद कुमार राय के साथ अवर अभियंता अनिल श्रीवास्तव को जिम्मेदार ठहराया था। घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के बजाय दोनों का तबादला करा दिया गया।
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नए सिरे से जांच शुरू होने के बाद जिला पंचायत में फिर खलबली मच गई है। तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने तत्कालीन सीडीओ सुनील कुमार वर्मा को जांच सौंपी थी लेकिन तब सीडीओ ने यह कहकर जांच लौटा दी थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मुझे जांच करने का अधिकार नहीं है। सवाल यह है कि ऐसे में फिर सीडीओ द्वारा जांच कैसे की जाएगी।
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इसके पूर्व तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी सुधीर कुमार एवं अभियंता अखिलेश कुमार ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों की जांच के क्रम में कागजों पर हुए करोड़ों के निर्माण कार्यों के साथ सोलर लाइट एवं साइन बोर्ड घोटाले को उजागर करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर, अभियंता अरविंद कुमार राय के साथ अवर अभियंता अनिल श्रीवास्तव को जिम्मेदार ठहराया था। घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के बजाय दोनों का तबादला करा दिया गया।
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