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एक परमात्मा को मान लें तो झगड़ा खत्म
Updated Wed, 25 Apr 2018 12:52 AM IST
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भदोही। जब हम एक परमात्मा को साक्षी मान लेते हैं तो हमें अपने आप सारा संसार एक परिवार लगने लगता है। भाईचारे की भावना खुद ब खुद आ जाती है और आपसी बैर समाप्त हो जाता है। मंगलवार को रजपुरा में संत निरंकारी सत्संग कार्यक्रम में ये बातें संत रविकांत ने कहीं। निरंकारी बाबा गुरुवचन सिंह और उनके अंगरक्षक प्रताप सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
संत ने कहा कि जिस प्रभु परमात्मा को हम राम, अल्लाह, वाहे गुरु आदि नामों से पुकारते हैं। ऐसे परमपिता की यदि हमें पहचान हो जाए कि वह एक ही है तो सारा झगड़ा ही खत्म हो जाए और हम जीवन भर भाई भाई बन कर रह सकते हैं। आपस में प्रेम का भाव होगा। उन्होंने कहा कि मानव को चीटियों, मधुमक्खियों व तमाम पशु पक्षियों की अद्भुत एकता देखकर सीख लेनी चाहिए। लेकिन फिर भी कोई सीख लेने के लिए आगे नहीं बढ़ता। जब भी कहीं मानव एकता दिखी वहां स्वर्ग की तरह आकर्षण और सुंदरता झलकी।
खचाखच भले सत्संग हाल में उन्होंने युग प्रवर्तक बाबा गुरुबचन सिंह की जीवन यात्रा पर चर्चा की। बताया कि वे जीवन भर में मानव एकता की कड़ी को जोड़ने का प्रयास करते रहे। मानवता की बलिवेदी पर खुद कुर्बान होकर वे मानव एकता की तेजस्वी मशाल बाबा हरदेव सिंह को सौंप गए। आज उसी को हमें आगे बढ़ाना है। उन्होंने लोगों से संकल्प लिया। संचालन बृजलाल ने किया। सत्संग में मुख्य रूप से राजेश, रमाशंकर, चंद्रेश कुमार, विभा और जोगेंद्र आदि मौजूद थे।
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संत ने कहा कि जिस प्रभु परमात्मा को हम राम, अल्लाह, वाहे गुरु आदि नामों से पुकारते हैं। ऐसे परमपिता की यदि हमें पहचान हो जाए कि वह एक ही है तो सारा झगड़ा ही खत्म हो जाए और हम जीवन भर भाई भाई बन कर रह सकते हैं। आपस में प्रेम का भाव होगा। उन्होंने कहा कि मानव को चीटियों, मधुमक्खियों व तमाम पशु पक्षियों की अद्भुत एकता देखकर सीख लेनी चाहिए। लेकिन फिर भी कोई सीख लेने के लिए आगे नहीं बढ़ता। जब भी कहीं मानव एकता दिखी वहां स्वर्ग की तरह आकर्षण और सुंदरता झलकी।
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खचाखच भले सत्संग हाल में उन्होंने युग प्रवर्तक बाबा गुरुबचन सिंह की जीवन यात्रा पर चर्चा की। बताया कि वे जीवन भर में मानव एकता की कड़ी को जोड़ने का प्रयास करते रहे। मानवता की बलिवेदी पर खुद कुर्बान होकर वे मानव एकता की तेजस्वी मशाल बाबा हरदेव सिंह को सौंप गए। आज उसी को हमें आगे बढ़ाना है। उन्होंने लोगों से संकल्प लिया। संचालन बृजलाल ने किया। सत्संग में मुख्य रूप से राजेश, रमाशंकर, चंद्रेश कुमार, विभा और जोगेंद्र आदि मौजूद थे।
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