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समाप्त हो गए नक्शे, पर्यटकों को नहीं मिल पा रही सटीक जानकारी
Updated Sat, 21 Apr 2018 01:56 AM IST
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वाराणसी। जिस प्राचीन नगरी काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तमाम सरकारी और निजी संस्थाएं दिन-रात नई जुगत कर रही हैं तो वहीं उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग इस मेहनत पर पानी फेरने में लगा हुआ है। जिस नक्शे के बल पर देशी, विदेशी सैलानी काशी भ्रमण करते हैं वह लगभग एक महीने से समाप्त हो चुका है। ऐसे में सैलानियों को आधी-अधूरी जानकारी दी जा रही है। इसके चलते अवैध गाइड और अन्य लोग पर्यटकों को आसानी से गुमराह कर रहे हैं। जिससे देश की छवि खराब हो रही है।
बनारस में बने पर्यटन सूचना केंद्रों पर सैलानियों की सहूलियत के लिए फोल्डेबल नक्शे रखे गए हैं। कैंट रेलवे स्टेशन, सारनाथ, एयरपोर्ट पर बने पर्यटन सूचना केंद्रों पर जैसे ही कोई देशी-विदेशी पर्यटक आता है सूचना अधिकारी उनको नक्शे के माध्यम से प्राचीन नगरी काशी के प्रमुख स्थलों और घाटों तक जाने का रास्ता, वहां जोन के लिए साधन, खर्च आदि की जानकारी इसी के साथ दे देते हैं। सैलानी सफर के दौरान दिक्कत होने पर मिले नक्शे को देख लेता है और असमंजस की स्थित समाप्त हो जाती है। ऐसे में पर्यटक को काफी जानकारी हो जाती है और वह कहीं भी ठगी का शिकार नही होते। कुछ दिनों से नक्शे खत्म हो गए हैं। ऐसे में आने वाले सैलानियों को मौखिक जानकारी दी जा रही है। बहुत हुआ तो उन्हें रफ पेपर पर टेढ़ा मेढ़ा समझा दिया जाता है। ऐसे में उनको पूरी जानकारी नही हो पाती और वह गुमराह हो रहे हैं। कई बार सूचना केंद्र से पत्र के माध्यम से नक्शे खत्म होने की जानकारी दी गई पर कोई सुनवाई नही हुई।
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बनारस में बने पर्यटन सूचना केंद्रों पर सैलानियों की सहूलियत के लिए फोल्डेबल नक्शे रखे गए हैं। कैंट रेलवे स्टेशन, सारनाथ, एयरपोर्ट पर बने पर्यटन सूचना केंद्रों पर जैसे ही कोई देशी-विदेशी पर्यटक आता है सूचना अधिकारी उनको नक्शे के माध्यम से प्राचीन नगरी काशी के प्रमुख स्थलों और घाटों तक जाने का रास्ता, वहां जोन के लिए साधन, खर्च आदि की जानकारी इसी के साथ दे देते हैं। सैलानी सफर के दौरान दिक्कत होने पर मिले नक्शे को देख लेता है और असमंजस की स्थित समाप्त हो जाती है। ऐसे में पर्यटक को काफी जानकारी हो जाती है और वह कहीं भी ठगी का शिकार नही होते। कुछ दिनों से नक्शे खत्म हो गए हैं। ऐसे में आने वाले सैलानियों को मौखिक जानकारी दी जा रही है। बहुत हुआ तो उन्हें रफ पेपर पर टेढ़ा मेढ़ा समझा दिया जाता है। ऐसे में उनको पूरी जानकारी नही हो पाती और वह गुमराह हो रहे हैं। कई बार सूचना केंद्र से पत्र के माध्यम से नक्शे खत्म होने की जानकारी दी गई पर कोई सुनवाई नही हुई।
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