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अधिक उत्पादन वाले फसलों का विकास जरूरी0
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:04 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के अनुवांशिकीय एवं पादप प्रजनन विभाग और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में दो दिवसीय सेमीनार का शताब्दी कृषि सभागार में मंगलवार को उद्घाटन हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने किसानों की आय बढ़ाने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्य अतिथि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक विभाग के अध्यक्ष आशीष बी गुहा ने कहा धान-गेहूं जैसी फसलों ने हमारे देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन फ सलों का भोजन में अधिक प्रयोग हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि अधिक उत्पादन वाले फसलों के विकास पर जोर दिया जाए, जिससे कि किसी तरह का कोई संकट न उत्पन्न हो। फिलीपिंस के वैज्ञानिक डॉ. नफिस मिया ने कहा कि दक्षिण एशिया के देश विशेष रूप से भारत- बांग्लादेश और नेपाल की 40 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या जिसमें महिलाएं और बच्चें कुपोषण और बीमारियों से ग्रस्त है। यदि तुरंत प्रभावशाली कदम नहीं उठाएं गये तो स्थिति भयावह हो सकती है। अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह ने कहा कि देश में कृषि वैज्ञानिकों के सामने एक ऐसी सामाजिक-राजनीतिक एवं अवैज्ञानिक दृष्टिकोण की चुनौती आयी है जिसने जैव प्रौद्योगिकी के कृषि में उपयोग को प्रभावित किया है। इस दौरान संस्थान के निदेशक प्रो. ए वैशंपायन, प्रो.पीके सिंह, प्रो. बंदना बोस, डॉ. रक्षित, डॉ.रमेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक विभाग के अध्यक्ष आशीष बी गुहा ने कहा धान-गेहूं जैसी फसलों ने हमारे देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन फ सलों का भोजन में अधिक प्रयोग हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि अधिक उत्पादन वाले फसलों के विकास पर जोर दिया जाए, जिससे कि किसी तरह का कोई संकट न उत्पन्न हो। फिलीपिंस के वैज्ञानिक डॉ. नफिस मिया ने कहा कि दक्षिण एशिया के देश विशेष रूप से भारत- बांग्लादेश और नेपाल की 40 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या जिसमें महिलाएं और बच्चें कुपोषण और बीमारियों से ग्रस्त है। यदि तुरंत प्रभावशाली कदम नहीं उठाएं गये तो स्थिति भयावह हो सकती है। अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह ने कहा कि देश में कृषि वैज्ञानिकों के सामने एक ऐसी सामाजिक-राजनीतिक एवं अवैज्ञानिक दृष्टिकोण की चुनौती आयी है जिसने जैव प्रौद्योगिकी के कृषि में उपयोग को प्रभावित किया है। इस दौरान संस्थान के निदेशक प्रो. ए वैशंपायन, प्रो.पीके सिंह, प्रो. बंदना बोस, डॉ. रक्षित, डॉ.रमेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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