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शराब कंपनी के नाम पर चिट फंड का धंधा चलाता था रघु
Updated Sat, 04 Nov 2017 02:23 AM IST
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वाराणसी। बाबतपुर एयरपोर्ट से गुरुवार की रात गिरफ्तार चिट फंड कंपनी पिनकॉन का प्रबंधक रघु शेट्टी एक प्रतिष्ठित लीकर कंपनी के नाम का फायदा उठाता रहा है। कोलकाता की लीकर कंपनी पिनकॉन का अरबों रुपये का कारोबार है। कंपनी 1978 से काम कर रही है। प. बंगाल में कंपनी की अच्छी साख है। चिटफंड कंपनी इसी के नाम का इस्तेमाल कर बाजार में धमक जमाती थी। लीकर कंपनी पिनकॉन और चिटफंड कंपनी पिनकॉन के बीच क्या तालमेल है, फिलहाल ये स्पष्ट नहीं हो सका है। जांच एजेंसियां इसकी पड़ताल में जुटी हैं। सूत्रों की मानें तो इस लीकर कंपनी में वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई बड़े शराब कारोबारियों केे पैसे लगे हैं।
चिटफंड कंपनी पिनकॉन करीब चार साल बाद फिर शहर में लौटी थी। रघु शेट्टी एक बार फिर वाराणसी में धोखाधड़ी का कारोबार जमाकर पूर्वांचल से बिहार तक जाल फैलाना चाहता था। सितंबर 2014 में कंपनी के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। तब निवेशकों ने हंगामा भी किया था। आरोप था कि कंपनी ने अचानक एक दिन अपना कार्यालय बंद कर दिया था और भाग गई थी। कंपनी सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार हुई थी। अब फिर नए सिरे से नाम बदल कर काम शुरू करने की तैयारी थी।
कंपनी का दफ्तर में पूर्व में सिगरा में अनंत कॉम्प्लेक्स में हुआ करता था। रातों-रात बोर्ड हटाकर कंपनी फरार हो गई थी। सैकड़ों निवेशकों ने पैसा वापसी की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया था। पुलिस ने मामले की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया था। पुलिस ने तभी सख्ती बरती होती तो बड़ा रैकेट पकड़ा जाता। जानकारी के मुताबिक, पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के करीब 50 हजार लोगों के करोड़ों रुपये से अधिक इस कंपनी में लगे थे। 14.5 फीसदी ब्याज की पेशकश पर लोगों ने इस चिटफंड कंपनी में आंख मूंदकर निवेश किया था। शुरू के दो साल कंपनी ने लोगों के रुपये दोगुने भी किए और गायब हो गई। एक निवेशक ने बताया कि पिनकॉन में 11 कंपनियां हैं। कंपनी हर एक, दो साल बाद नाम बदलती रहती है।
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चिटफंड कंपनी पिनकॉन करीब चार साल बाद फिर शहर में लौटी थी। रघु शेट्टी एक बार फिर वाराणसी में धोखाधड़ी का कारोबार जमाकर पूर्वांचल से बिहार तक जाल फैलाना चाहता था। सितंबर 2014 में कंपनी के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। तब निवेशकों ने हंगामा भी किया था। आरोप था कि कंपनी ने अचानक एक दिन अपना कार्यालय बंद कर दिया था और भाग गई थी। कंपनी सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार हुई थी। अब फिर नए सिरे से नाम बदल कर काम शुरू करने की तैयारी थी।
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कंपनी का दफ्तर में पूर्व में सिगरा में अनंत कॉम्प्लेक्स में हुआ करता था। रातों-रात बोर्ड हटाकर कंपनी फरार हो गई थी। सैकड़ों निवेशकों ने पैसा वापसी की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया था। पुलिस ने मामले की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया था। पुलिस ने तभी सख्ती बरती होती तो बड़ा रैकेट पकड़ा जाता। जानकारी के मुताबिक, पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के करीब 50 हजार लोगों के करोड़ों रुपये से अधिक इस कंपनी में लगे थे। 14.5 फीसदी ब्याज की पेशकश पर लोगों ने इस चिटफंड कंपनी में आंख मूंदकर निवेश किया था। शुरू के दो साल कंपनी ने लोगों के रुपये दोगुने भी किए और गायब हो गई। एक निवेशक ने बताया कि पिनकॉन में 11 कंपनियां हैं। कंपनी हर एक, दो साल बाद नाम बदलती रहती है।
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