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ओडीएफ होने में अभी और लगेगा समय, 43.55 प्रतिशत काम बाकी
Updated Tue, 02 Oct 2018 02:16 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो वाराणसी/ कछवारोड/ दानगंज/ राजातलाब/ रोहनिया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत दो अक्तूबर से जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने की बात कही गई थी। लेकिन, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अभी ओडीएफ घोषित करने में समय लगेगा। अब तक 56.45 प्रतिशत गांव ही ओडीएफ हुए हैं, बाकी होने में अभी समय लगेगा। जिले में 1332 राजस्व गांवों में से 752 गांव ओडीएफ हो चुके हैं।
सेवापुरी ब्लाक के मिल्कीपुर गांव की दलित बस्ती के पास बने अर्ध निर्मित शौचालय स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखा रहे हैं। इस मामले में लाभार्थी कमला व अन्य लाभार्थियों का कहना है कि हम लोगों के नाम से जो शौचालय का निर्माण शुरू कराया गया वो अब तक अधूरा है। इसी तरह डोमैला गांव स्थित एक ही परिवार में आधा दर्जन बने शौचालय के सामने गोबर पथाई का कार्य चल रहा है। आरोप है कि लाभार्थी प्रधान के करीबी होने के चलते लाभ ले लिए पर इस्तेमाल नहीं किए। यहां अब उपले रखे जाते हैं। हालांकि डोमैला गांव के प्रधान मुरारी बिंद का कहना है कि 2012 में लोहिया गांव होने के दौरान यहां शौचालय बनाया गया। ये मेरे कार्यकाल में नहीं बने हैं।
दानगंज गांव में स्थिति बेहद खराब है। कहीं एक गड्ढे पर शौचालय का निर्माण कराया गया है तो कहीं दीवार बनाकर छोड़ दी गई है। चोलापुर ब्लाक की कई ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह का खेल जारी है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत छोटे लाल ने बताया कि ओडीएफ घोषित करने के लिए शौचालय पूर्ण कराए जा रहे हैं। आराजीलाइन के सहायक विकास अधिकारी पंचायत सुनील सिंह ने बताया कि 117 गांवों में से 87 गांव ओडीएफ हो चुके हैं।
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कोट्स
कोई भी काम फूलप्रूफ होना चाहिए। आंकड़ेबाजी से कोई काम नहीं किया जाएगा। आधी अधूरी तैयारियों के साथ ओडीएफ घोषित नहीं होगा।
-दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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सेवापुरी ब्लाक के मिल्कीपुर गांव की दलित बस्ती के पास बने अर्ध निर्मित शौचालय स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखा रहे हैं। इस मामले में लाभार्थी कमला व अन्य लाभार्थियों का कहना है कि हम लोगों के नाम से जो शौचालय का निर्माण शुरू कराया गया वो अब तक अधूरा है। इसी तरह डोमैला गांव स्थित एक ही परिवार में आधा दर्जन बने शौचालय के सामने गोबर पथाई का कार्य चल रहा है। आरोप है कि लाभार्थी प्रधान के करीबी होने के चलते लाभ ले लिए पर इस्तेमाल नहीं किए। यहां अब उपले रखे जाते हैं। हालांकि डोमैला गांव के प्रधान मुरारी बिंद का कहना है कि 2012 में लोहिया गांव होने के दौरान यहां शौचालय बनाया गया। ये मेरे कार्यकाल में नहीं बने हैं।
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दानगंज गांव में स्थिति बेहद खराब है। कहीं एक गड्ढे पर शौचालय का निर्माण कराया गया है तो कहीं दीवार बनाकर छोड़ दी गई है। चोलापुर ब्लाक की कई ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह का खेल जारी है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत छोटे लाल ने बताया कि ओडीएफ घोषित करने के लिए शौचालय पूर्ण कराए जा रहे हैं। आराजीलाइन के सहायक विकास अधिकारी पंचायत सुनील सिंह ने बताया कि 117 गांवों में से 87 गांव ओडीएफ हो चुके हैं।
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कोई भी काम फूलप्रूफ होना चाहिए। आंकड़ेबाजी से कोई काम नहीं किया जाएगा। आधी अधूरी तैयारियों के साथ ओडीएफ घोषित नहीं होगा।
-दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त