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अरे भइया! डॉक्टर साहब कब तक आएंगे
Updated Fri, 20 Apr 2018 01:23 AM IST
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ज्ञानपुर। दिन: बृहस्पतिवार। स्थान: जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर। समय: सुबह आठ बजे। अस्पताल की ओपीडी खुल गई है पर डॉक्टर साहब नजर नहीं आ रहे। गर्मी में उल्टी-दस्त, बुखार समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज चिकित्सकों का इंतजार कर रहे हैं। एक-दूसरे से पूछते हैं, भाई, डाक्टर साहब कब तक आएंगे। दो घंटे बाद करीब 10 बजे सभी विभागों के चिकित्सक अपने-अपने कक्ष में पहुंचते हैं। तब तक पूरी ओपीडी खचाखच भर चुकी थी।
शासन की तमाम सख्ती के बाद भी सरकारी अस्पतालों की दशा और दिशा में सुधार होता नहीं दिख रहा है। सूबे की सत्ता भले ही बदली पर डाक्टरों की मनमानी जस की तस चल रही है। देर से आने और जल्दी जाने की प्रथा अस्पतालों में खत्म नहीं हो रही है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम सुबह आठ बजे जिला अस्पताल पहुंची तो वहां के हालात चिकित्सकों की मनमानी की कहानी बयां करते दिखे। सुबह आठ बजे ओपीडी के सभी कक्ष खुल गए थे लेकिन कोई चिकित्सक नहीं थे। 8:30 बजे तक ओपीडी के बाहर मरीजों की लाइन लंबी होने लगी। पर्ची कटाने के बाद मरीज डाक्टरों का इंतजार करते रहे। दूर-दराज से मरीज आते रहे और चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। वहां बैठे कुछ मरीजों से बात करने पर पता चला कि डाक्टर साहब 10 बजे के पहले आने वाले नही हैं। इस बीच कुछ मरीजों से बात करने पर नई बात सामने आई। कक्ष संख्या सात के बाहर बैठी कुसुम ने बताया कि यहां डॉक्टर अच्छे से नहीं देखते हैं। बाहर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और वहां आराम से मरीजों को देखते हैं और परामर्श देते हैं। वहीं, डीघ से आए लंगर खान ने बताया कि ज्यादातर दवाइयां बाहर से लिखी जाती हैं, जो बहुत महंगी होती हैं। इसी बीच डाक्टर साहब 9:55 बजे ओपीडी में दाखिल हुए। इसी दौरान दूसरे चिकित्सक भी अपने-अपने कक्ष में पहुंचे। मौके पर मौजूद प्रकाश, मुन्ना, सुरसती, मोसीम, दिनेश आदि लोगों ने चिकित्सकों के देरी से आने पर नाराजगी जाहिर की।
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शासन की तमाम सख्ती के बाद भी सरकारी अस्पतालों की दशा और दिशा में सुधार होता नहीं दिख रहा है। सूबे की सत्ता भले ही बदली पर डाक्टरों की मनमानी जस की तस चल रही है। देर से आने और जल्दी जाने की प्रथा अस्पतालों में खत्म नहीं हो रही है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम सुबह आठ बजे जिला अस्पताल पहुंची तो वहां के हालात चिकित्सकों की मनमानी की कहानी बयां करते दिखे। सुबह आठ बजे ओपीडी के सभी कक्ष खुल गए थे लेकिन कोई चिकित्सक नहीं थे। 8:30 बजे तक ओपीडी के बाहर मरीजों की लाइन लंबी होने लगी। पर्ची कटाने के बाद मरीज डाक्टरों का इंतजार करते रहे। दूर-दराज से मरीज आते रहे और चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। वहां बैठे कुछ मरीजों से बात करने पर पता चला कि डाक्टर साहब 10 बजे के पहले आने वाले नही हैं। इस बीच कुछ मरीजों से बात करने पर नई बात सामने आई। कक्ष संख्या सात के बाहर बैठी कुसुम ने बताया कि यहां डॉक्टर अच्छे से नहीं देखते हैं। बाहर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और वहां आराम से मरीजों को देखते हैं और परामर्श देते हैं। वहीं, डीघ से आए लंगर खान ने बताया कि ज्यादातर दवाइयां बाहर से लिखी जाती हैं, जो बहुत महंगी होती हैं। इसी बीच डाक्टर साहब 9:55 बजे ओपीडी में दाखिल हुए। इसी दौरान दूसरे चिकित्सक भी अपने-अपने कक्ष में पहुंचे। मौके पर मौजूद प्रकाश, मुन्ना, सुरसती, मोसीम, दिनेश आदि लोगों ने चिकित्सकों के देरी से आने पर नाराजगी जाहिर की।
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