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सांस्कृतिक चेतना की संवाहक हैं पुस्तकें
Updated Tue, 30 Jan 2018 02:12 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू कला संकाय में सात दिवसीय पुस्तक मेले (29 जनवरी से 4 फरवरी) का सोमवार को शुभारंभ हुआ। राधाकृष्णन सभागार में लगे मेले का उद्घाटन कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज और कवि व भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने किया।
राजकमल प्रकाशन की ओर से लगाए गए मेले में मुख्य वक्ता प्रो. शुक्ला ने कहा कि पुस्तकें सांस्कृतिक चेतना का निर्माण ही नहीं करतीं बल्कि उसे एक व्यापक संदर्भ भी देती हैं। उन्होंने पुस्तक संस्कृति की चर्चा करते हुए शब्द सत्ता की महत्ता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ई समय में भी छपी पुस्तकें महत्वपूर्ण हैं। प्रो. शुक्ल ने इस दौरान आयोजकों को काशी के लेखकों, रचनाकारों की पुस्तकों को एक ही जगह लगाने का सुझाव दिया, जिससे कि विद्यार्थियों के साथ सभी को लेखकों की जानकारी मिल सके। अध्यक्षता करते हुए प्रो. कुमार पंकज ने कहा कि किताबें हमें सुख देती हैं। हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा हैं। कहा कि किताबें समाज को ताकत भी देती हैं। यही कारण है कि उनकी प्रतिरोधी चेतना से बड़ी-बड़ी सत्ताएं भी सशंकित रहती हैं। डॉ. प्रभाकर सिंह ने पुस्तक संस्कृति को ज्ञान परम्परा के संवाहक के रूप में याद किया। अंजनी मिश्र ने बताया कि मेले में विषयों के साथ-साथ आईएएस, पीसीएस आदि प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध हैं। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र शिव कुमार यादव और धन्यवाद ज्ञापन अंजनी मिश्र ने किया।
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राजकमल प्रकाशन की ओर से लगाए गए मेले में मुख्य वक्ता प्रो. शुक्ला ने कहा कि पुस्तकें सांस्कृतिक चेतना का निर्माण ही नहीं करतीं बल्कि उसे एक व्यापक संदर्भ भी देती हैं। उन्होंने पुस्तक संस्कृति की चर्चा करते हुए शब्द सत्ता की महत्ता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ई समय में भी छपी पुस्तकें महत्वपूर्ण हैं। प्रो. शुक्ल ने इस दौरान आयोजकों को काशी के लेखकों, रचनाकारों की पुस्तकों को एक ही जगह लगाने का सुझाव दिया, जिससे कि विद्यार्थियों के साथ सभी को लेखकों की जानकारी मिल सके। अध्यक्षता करते हुए प्रो. कुमार पंकज ने कहा कि किताबें हमें सुख देती हैं। हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा हैं। कहा कि किताबें समाज को ताकत भी देती हैं। यही कारण है कि उनकी प्रतिरोधी चेतना से बड़ी-बड़ी सत्ताएं भी सशंकित रहती हैं। डॉ. प्रभाकर सिंह ने पुस्तक संस्कृति को ज्ञान परम्परा के संवाहक के रूप में याद किया। अंजनी मिश्र ने बताया कि मेले में विषयों के साथ-साथ आईएएस, पीसीएस आदि प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध हैं। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र शिव कुमार यादव और धन्यवाद ज्ञापन अंजनी मिश्र ने किया।
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