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स्वतंत्र भारत के भविष्य के लिए सजग थे महामना
Updated Mon, 11 Dec 2017 02:13 AM IST
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वाराणसी। मालवीय जी का जीवन और कार्य मानव कल्याण के लिए समर्पित था। उन्होंने चार पुरुषार्थों के समन्वय और उच्च शिक्षा के समन्वय के लिए बीएचयू की स्थापना की थी। स्वतंत्र भारत के भविष्य के लिए महामना सजग थे। राष्ट्र का निर्माण केवल विराट चित्त वाले महापुरुष ही कर सकते हैं। उक्त विचार रविवार को बीएचयू में भारतरत्न पं. मदन मोहन मालवीय की 156वीं जयंती पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने व्यक्त किए।
राष्ट्र्र निर्माण में महामना के लोक प्रेरक जीवनादर्श मूल्य विषयक संगोष्ठी का आयोजन मालवीय भवन एवं मालवीय मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस दौरान प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव, मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय, जेपी विश्वविद्यालय बिहार के कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह, आचार्य कामेश्वर उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता कुलसचिवव डा. नीरज त्रिपाठी ने की। स्वागत विजय नाथ पांडेय, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शैलेंद्र गुप्ता और संचालन प्रो. उपेंद्र पांडेय ने किया।
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राष्ट्र्र निर्माण में महामना के लोक प्रेरक जीवनादर्श मूल्य विषयक संगोष्ठी का आयोजन मालवीय भवन एवं मालवीय मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस दौरान प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव, मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय, जेपी विश्वविद्यालय बिहार के कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह, आचार्य कामेश्वर उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता कुलसचिवव डा. नीरज त्रिपाठी ने की। स्वागत विजय नाथ पांडेय, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शैलेंद्र गुप्ता और संचालन प्रो. उपेंद्र पांडेय ने किया।
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