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देव दीपावली कल, सिल्ट से पटे घाट
Updated Fri, 03 Nov 2017 01:58 AM IST
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वाराणसी। देव दीपावली सिर पर है। रोशनी के इस महामेले की तैयारियां जोरों पर हैं लेकिन गंगा किनारे जहां यह मेला सजेगा, वहां के हालात अब तक दुरुस्त नहीं कराए जा सके हैं। घाटों पर जगह-जगह सिल्ट जमी है। कहीं-कहीं तो दलदली होने के नाते सिल्ट इतनी खतरनाक बन गई है कि कब कौन फिसलकर उसकी चपेट में आ जाए कोई ठीक नहीं। अधिकतर घाटों पर साफ-सफाई भी बदहाल है। जलधारा में माला-फूल और अन्य अपशिष्ट बजबजा रहे हैं। घाटों पर जगह-जगह गंदगी फैली है जबकि नगर निगम का दावा है कि सिल्ट हटाने और साफ-सफाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही निजी एजेंसी आईएलएफएस को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पक्का महाल यानी अस्सी से राजघाट तक गंगा किनारे देवदीपावली पर दीपमालाएं सजेंगी। देश-विदेश के लाखों लोग रोशनी के इस अनूठे महाउत्सव का साक्षी बनेंगेे। देवदीपावली देखने के लिए लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बावजूद इसके नगर निगम के नकारेपन और लापरवाही से घाटों से न तो सिल्ट हटाई जा सकी है और न ही साफ-सफाई व अन्य इंतजाम दुरुस्त कराए जा सके हैं। अस्सी घाट से लेकर गंगा महल, रीवा घाट और तुलसी घाट पर गंगा किनारे सिल्ट पटी है। भदैनी के सामने जलधारा में माला-फूल, पॉलीथिन सहित अन्य अपशिष्ट बजबजा रहे हैं। घाट की सीढ़ियों पर भी जगह-जगह कचरा पड़ा दिखा। ऐसी ही हालत हरिश्चंद्र घाट सहित आसपास के घाटों पर दिखी। दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद घाट और शीतला घाट पर हालात कुछ बेहतर दिखे लेकिन घुमंतू पशुओं का जमावड़ा पहले की तरह था।
राजघाट के पास भैंसासुर घाट, बूंदी परकोटा घाट, दरभंगा घाट राणा महल घाट पर भी जगह-जगह सिल्ट और गंदगी से हालत बदतर नजर आए। नगर निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का कहना है कि सिल्ट हटाने, घाटों की सफाई और फूलमाला व अन्य अपशिष्ट को निकालने की जिम्मेदारी आईएलएफएस को दी गई है। युद्धस्तर पर कार्य कराया जा रहा है और उसकी निगरानी भी की जा रही है। जहां अभी सफाई नहीं हो पाई है, वहां शनिवार की शाम तक सिल्ट हटाकर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी।
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पक्का महाल यानी अस्सी से राजघाट तक गंगा किनारे देवदीपावली पर दीपमालाएं सजेंगी। देश-विदेश के लाखों लोग रोशनी के इस अनूठे महाउत्सव का साक्षी बनेंगेे। देवदीपावली देखने के लिए लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बावजूद इसके नगर निगम के नकारेपन और लापरवाही से घाटों से न तो सिल्ट हटाई जा सकी है और न ही साफ-सफाई व अन्य इंतजाम दुरुस्त कराए जा सके हैं। अस्सी घाट से लेकर गंगा महल, रीवा घाट और तुलसी घाट पर गंगा किनारे सिल्ट पटी है। भदैनी के सामने जलधारा में माला-फूल, पॉलीथिन सहित अन्य अपशिष्ट बजबजा रहे हैं। घाट की सीढ़ियों पर भी जगह-जगह कचरा पड़ा दिखा। ऐसी ही हालत हरिश्चंद्र घाट सहित आसपास के घाटों पर दिखी। दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद घाट और शीतला घाट पर हालात कुछ बेहतर दिखे लेकिन घुमंतू पशुओं का जमावड़ा पहले की तरह था।
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राजघाट के पास भैंसासुर घाट, बूंदी परकोटा घाट, दरभंगा घाट राणा महल घाट पर भी जगह-जगह सिल्ट और गंदगी से हालत बदतर नजर आए। नगर निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का कहना है कि सिल्ट हटाने, घाटों की सफाई और फूलमाला व अन्य अपशिष्ट को निकालने की जिम्मेदारी आईएलएफएस को दी गई है। युद्धस्तर पर कार्य कराया जा रहा है और उसकी निगरानी भी की जा रही है। जहां अभी सफाई नहीं हो पाई है, वहां शनिवार की शाम तक सिल्ट हटाकर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी।
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