UP: एनएचएमसी के डीजी को सौंपा 1200 साल पुराना एकमुखी शिवलिंग, गुजरात के लोथल म्यूजियम में रखा जाएगा
Varanasi News: विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज वाराणसी क्षेत्र में मध्यकालीन शैव परंपरा, गंगा तटीय सभ्यता तथा प्रतिहार कालीन कला शैली के अध्ययन हेतु एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
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हर-हर महादेव के जयघोष के बीच चौबेपुर के ग्रामीणों ने गंगा तट से मिले 1200 साल पुराने एकमुखी शिवलिंग को एनएचएमसी (राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर) के डायरेक्टर जनरल प्रो. वसंत शिंदे को सौंप दिया। शनिवार को लोगों के चेहरे पर संतुष्टि और गर्व का भाव था कि अब चौबेपुर इलाके में छिपा इतिहास फिर से पटल पर स्थापित होगा।
चौबेपुर में गंगा के तट पर मिले एकमुखी शिवलिंग को गुजरात के लोथल म्यूजियम में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार चौबेपुर की किसी खोज को राष्ट्रीय स्तर पर स्थान मिला है। कार्यक्रम के बाद शिवलिंग को सुरक्षित पैक करके लोथल भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज न केवल कला इतिहास को नई दिशा देगी बल्कि गंगा तटीय सभ्यता के अध्ययन को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।
प्रो. वसंत शिंदे ने कहा कि लोथल म्यूजियम में हम समुद्री व्यापार से जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचा रहे हैं। व्यापार के कारण ही हमें यह प्रमाण मिलता है कि हमारी संस्कृति विदेशों तक कैसे पहुंची। इसी संदर्भ में हमारी एक गैलरी भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के संपर्क पर आधारित है।
भारतीय संस्कृति की बात
हम इस गैलरी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि हिंदू, बौद्ध और जैन विचारधाराएं भारत से निकलकर कैसे पूरे विश्व में प्रचारित प्रसारित हुईं। भारतीय संस्कृति के जो तत्व वहां गए, उन्हें हम साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने चौबेपुर की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा के लोग इस धरोहर के वास्तविक संरक्षक हैं। आज स्थानीय निवासियों ने जिस गर्व और आत्मीयता के साथ अपने इलाके की इस खोज को एनएचएमसी को सौंपा वह इस शिवलिंग की तरह ही दुर्लभ है।
इस शिवलिंग की कलात्मक विशेषताएं प्रतिहार कालीन शैली की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं और स्थानीय कारीगरों की निपुणता इसमें साफ दिखाई देती है। ऐसी खोजें यह समझने में मदद करती हैं कि हमारी पुरानी बसाहटें कितनी विकसित और परिपक्व हुआ करती थीं।
इस दाैरान बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, कृषि वैज्ञानिक अखिलेश चौबे, शिक्षक अतुल चतुर्वेदी, विनोद चतुर्वेदी, अपूर्व कुमार तिवारी, मनीष सिंह, दिलीप सेठ सम्मिलित रहे। संचालन सृजन चतुर्वेदी ने किया।