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आकाश ने जीता मैथ विजार्ड का खिताब
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वाराणसी। इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करने के लिए रविवार को आईएमएस इंजीनियरिंग कालेज गाजियाबाद और अमर उजाला ने युवाओं को तैयारी परखने का मौका दिया। 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले वाराणसी व आसपास जिलों के चुनिंदा मेधावी छात्र-छात्राओं को मैथ विजार्ड के खिताब से नवाजा गया।
डालिम्स सनबीम रोहनिया में आयोजित ग्रैंड फिनाले में वाराणसी के सेंट्रल हिंदू ब्वॉयज स्कूल के छात्रों ने टॉप थ्री स्थानों पर कब्जा जमाया। प्रथम स्थान आकाश सिंह ने हासिल किया। उन्हें श्रीनिवास रामानुजन अवार्ड के तहत लैपटॉप दिया गया। दूसरे नंबर पर रहे प्रांजल बरनवाल व तृतीय स्थान पर रहे वेदांत कुमार को एसएस बोस अवार्ड के तौर पर एक-एक टैबलेट प्रदान किया गया। श्रेयश मिश्रा, अखिल विश्वकर्मा व अवनीश मिश्रा को सीआर राव अवार्ड प्रदान किया गया। सांत्वना पुरस्कार के तौर पर हर्ष गुप्ता व अनुराग को पीसी महालनोबिस अवार्ड दिया गया। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर प्रयागराज के सृजन व कनिष्क को शकुंतला देवी अवार्ड से पुरस्कृत किया गया
मुख्य अतिथि बीएचयू भौतिकी विभाग के प्रो. श्री सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि गणित विभाग आईआईटी बीएचयू के प्रो. संजय पांडेय, डालिम्स समूह के चेयरमैन प्रदीप मधोक, विद्यालय के प्रधानाचार्य वीके मिश्रा व आईएमएस गाजियाबाद के निदेशक श्रवण मुखर्जी ने मेधावियों को सम्मानित किया। आईएमएस गाजियाबाद की ओर से अवनीश अवस्थी ने इंजीनियर विषय व उनके क्षेत्रों के बारे में विस्तार से चर्चा की।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. श्री सिंह ने कहा कि आज का युग डिजिटल सशक्तीकरण का है। किसी भी देश के विकास में गणित व विज्ञान सबसे ज्यादा सहयोगी होती है, क्योंकि गणित हमारी सोचने की क्षमता का सृजन करती है। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक शिक्षा में भारत बहुत आगे हैं, लेकिन हम प्रायोगिक शिक्षा में पिछड़ जाते हैं। हमें इस पर ध्यान देना होगा। आप प्रयोग बढ़ाएं, करके दिखाएं, यही इंजीनियरिंग है।
कार्यक्रम के दौरान सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। इनमें सनबीम स्कूल वरुणा के अरुण कुमार श्रीवास्तव, उदय पब्लिक स्कूल फैजाबाद के गोपाल जी, सनबीम स्कूल वरुणा वाराणसी के नागमणि पांडेय, सेंट्रल हिंदू ब्वॉयज स्कूल की शिक्षिका स्नेहलता सिंह और इंटर कॉलेज कप्तानगंज (आजमगढ़) के सत्यम पांडेय शामिल हैं।
ग्रैंड फिनाले में बनारस, आजमगढ़, इलाहाबाद, मिर्जापुर आदि जिलों के स्कूलों के डेढ़ सौ विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। डेढ़ घंटे की मैथ विजार्ड प्रतियोगिता ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं की इंजीनियरिंग के प्रति रुचि परखने के लिए कराई गई थी।
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डालिम्स सनबीम रोहनिया में आयोजित ग्रैंड फिनाले में वाराणसी के सेंट्रल हिंदू ब्वॉयज स्कूल के छात्रों ने टॉप थ्री स्थानों पर कब्जा जमाया। प्रथम स्थान आकाश सिंह ने हासिल किया। उन्हें श्रीनिवास रामानुजन अवार्ड के तहत लैपटॉप दिया गया। दूसरे नंबर पर रहे प्रांजल बरनवाल व तृतीय स्थान पर रहे वेदांत कुमार को एसएस बोस अवार्ड के तौर पर एक-एक टैबलेट प्रदान किया गया। श्रेयश मिश्रा, अखिल विश्वकर्मा व अवनीश मिश्रा को सीआर राव अवार्ड प्रदान किया गया। सांत्वना पुरस्कार के तौर पर हर्ष गुप्ता व अनुराग को पीसी महालनोबिस अवार्ड दिया गया। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर प्रयागराज के सृजन व कनिष्क को शकुंतला देवी अवार्ड से पुरस्कृत किया गया
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मुख्य अतिथि बीएचयू भौतिकी विभाग के प्रो. श्री सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि गणित विभाग आईआईटी बीएचयू के प्रो. संजय पांडेय, डालिम्स समूह के चेयरमैन प्रदीप मधोक, विद्यालय के प्रधानाचार्य वीके मिश्रा व आईएमएस गाजियाबाद के निदेशक श्रवण मुखर्जी ने मेधावियों को सम्मानित किया। आईएमएस गाजियाबाद की ओर से अवनीश अवस्थी ने इंजीनियर विषय व उनके क्षेत्रों के बारे में विस्तार से चर्चा की।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. श्री सिंह ने कहा कि आज का युग डिजिटल सशक्तीकरण का है। किसी भी देश के विकास में गणित व विज्ञान सबसे ज्यादा सहयोगी होती है, क्योंकि गणित हमारी सोचने की क्षमता का सृजन करती है। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक शिक्षा में भारत बहुत आगे हैं, लेकिन हम प्रायोगिक शिक्षा में पिछड़ जाते हैं। हमें इस पर ध्यान देना होगा। आप प्रयोग बढ़ाएं, करके दिखाएं, यही इंजीनियरिंग है।
कार्यक्रम के दौरान सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। इनमें सनबीम स्कूल वरुणा के अरुण कुमार श्रीवास्तव, उदय पब्लिक स्कूल फैजाबाद के गोपाल जी, सनबीम स्कूल वरुणा वाराणसी के नागमणि पांडेय, सेंट्रल हिंदू ब्वॉयज स्कूल की शिक्षिका स्नेहलता सिंह और इंटर कॉलेज कप्तानगंज (आजमगढ़) के सत्यम पांडेय शामिल हैं।
ग्रैंड फिनाले में बनारस, आजमगढ़, इलाहाबाद, मिर्जापुर आदि जिलों के स्कूलों के डेढ़ सौ विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। डेढ़ घंटे की मैथ विजार्ड प्रतियोगिता ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं की इंजीनियरिंग के प्रति रुचि परखने के लिए कराई गई थी।