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बेटे को पढ़ाने के लिए बेच दी थी जमीन
Updated Sun, 29 Apr 2018 01:12 AM IST
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खमरिया। सचमुच! वह मौर्य परिवार के नूर हैं। पिता के संघर्षों को दिल में बसाकर उन्होंने जो सपना देखा, उसे हासिल कर उनके सिर को गर्व से ऊंचा कर दिया। जिस बेटे की पढ़ाई के लिए बाप ने जमीन बेच दी, उसने उनके त्याग को जाया नहीं होने दिया और कामयाबी की नई इबारत लिख डाली। बात हो रही खमरिया के झपटपुर निवासी संजीव कुमार मौर्य की, जिन्होंने संघ लोकसेवा आयोग की भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में 89वीं हासिल कर भदोही जिले का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया।
झपटपुर निवासी ओम प्रकाश मौर्य के दूसरे बेटे संजीव ने यूपीएससी की परीक्षा में आल इंडिया लेवल पर 89वीं रैंक हासिल की है। कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई गोपीगंज के सेंट थॉमस स्कूल से करने के बाद संजीव का यूपीटीयू में चयन हुआ। हाईस्कूल में 84 और इंटरमीडिएट में 82 फीसदी अंक हासिल करने वाले संजीव ने वर्ष 2013 में बीटेक (सिविल) में आईईटी लखनऊ में टॉप किया। जीआईसी लखनऊ में प्रवक्ता उनके चाचा विश्व प्रकाश मौर्य से संजीव को बेहतर मार्गदर्शन मिला। चाचा ने लखनऊ में अपने पास रखकर संजीव की आगे की पढ़ाई जारी रखी। बेटे की पढ़ाई में रुचि को देखते हुए पिता ओम प्रकाश ने सड़क किनारे पर स्थित अपनी दो विस्वा जमीन बेच दी। इसके बाद संजीव दिल्ली चले गए और एक कोचिंग से प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गए। इस दौरान उनका कई कंपनियों में नौकरी के लिए चयन हुआ, लेकिन दिलोदिमाग में केवल प्रशासनिक सेवा ही बस रही थी, सो सब कुछ भुलाकर जुटे रहे। दो प्रयासों में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद वह असफल हो गए लेकिन, तीसरा प्रयास संजीव के लिए कामयाबी वाला रहा। शुक्रवार की शाम रिजल्ट आने के बाद जब उन्होंने अपनी सफलता की सूचना दी तो घर में जश्न शुरू हो गया। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। इस दौरान उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। संजीव के पिता ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मैं कारपेट डिजाइन का काम करता था, लेकिन कालीन कारोबार में मंदी के बाद पांच साल से घर बैठा था। संजीव के बड़े भाई सुनील कुमार दिल्ली में प्राइवेट जॉब करते हैं।
इसी तरह ज्ञानपुर के बालीपुर निवासी अमोल श्रीवास्तव ने भी यूपीएससी की परीक्षा में 83वीं रैंक हासिल की। अमोल इन दिनों अपने पिता के साथ नोयडा में रहते हैं। वहीं, से उन्होंने तैयारी की और सिविल सेवा में चयनित हुए। अमोल की पढ़ाई-लिखाई जिले से बाहर ही हुई। इससे बालीपुर स्थित उनके परिवारीजनों में खुशी का माहौल है। अमोल ने 2015 में इंजीनियरिंग की जॉब छोड़कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की और चयनित हुए। उनके चाचा आनंद श्रीवास्तव गप्पू और उनके परिवारीजनों ने अमोल की सफलता पर खुशी जताई। उनका कहना था कि अमोल बचपन से ही प्रतिभाशाली था।
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झपटपुर निवासी ओम प्रकाश मौर्य के दूसरे बेटे संजीव ने यूपीएससी की परीक्षा में आल इंडिया लेवल पर 89वीं रैंक हासिल की है। कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई गोपीगंज के सेंट थॉमस स्कूल से करने के बाद संजीव का यूपीटीयू में चयन हुआ। हाईस्कूल में 84 और इंटरमीडिएट में 82 फीसदी अंक हासिल करने वाले संजीव ने वर्ष 2013 में बीटेक (सिविल) में आईईटी लखनऊ में टॉप किया। जीआईसी लखनऊ में प्रवक्ता उनके चाचा विश्व प्रकाश मौर्य से संजीव को बेहतर मार्गदर्शन मिला। चाचा ने लखनऊ में अपने पास रखकर संजीव की आगे की पढ़ाई जारी रखी। बेटे की पढ़ाई में रुचि को देखते हुए पिता ओम प्रकाश ने सड़क किनारे पर स्थित अपनी दो विस्वा जमीन बेच दी। इसके बाद संजीव दिल्ली चले गए और एक कोचिंग से प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गए। इस दौरान उनका कई कंपनियों में नौकरी के लिए चयन हुआ, लेकिन दिलोदिमाग में केवल प्रशासनिक सेवा ही बस रही थी, सो सब कुछ भुलाकर जुटे रहे। दो प्रयासों में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद वह असफल हो गए लेकिन, तीसरा प्रयास संजीव के लिए कामयाबी वाला रहा। शुक्रवार की शाम रिजल्ट आने के बाद जब उन्होंने अपनी सफलता की सूचना दी तो घर में जश्न शुरू हो गया। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। इस दौरान उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। संजीव के पिता ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मैं कारपेट डिजाइन का काम करता था, लेकिन कालीन कारोबार में मंदी के बाद पांच साल से घर बैठा था। संजीव के बड़े भाई सुनील कुमार दिल्ली में प्राइवेट जॉब करते हैं।
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इसी तरह ज्ञानपुर के बालीपुर निवासी अमोल श्रीवास्तव ने भी यूपीएससी की परीक्षा में 83वीं रैंक हासिल की। अमोल इन दिनों अपने पिता के साथ नोयडा में रहते हैं। वहीं, से उन्होंने तैयारी की और सिविल सेवा में चयनित हुए। अमोल की पढ़ाई-लिखाई जिले से बाहर ही हुई। इससे बालीपुर स्थित उनके परिवारीजनों में खुशी का माहौल है। अमोल ने 2015 में इंजीनियरिंग की जॉब छोड़कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की और चयनित हुए। उनके चाचा आनंद श्रीवास्तव गप्पू और उनके परिवारीजनों ने अमोल की सफलता पर खुशी जताई। उनका कहना था कि अमोल बचपन से ही प्रतिभाशाली था।
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