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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में टूटी 238 साल पुरानी परंपरा
Updated Thu, 15 Feb 2018 02:40 AM IST
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वाराणसी। महाशिवरात्रि की भोर में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में होने वाली चौथे चरण की आरती बुधवार को दो घंटे विलंब से पूरी हुई। ऐसा काशी विश्वनाथ मंदिर के 238 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है। चौथे चरण की आरती सुबह साढ़े छह बजे पूर्ण हो जानी चाहिए थी लेकिन आरती दो घंटे की देरी से पूरी हुई।
मंदिर प्रबंधन और पुलिसकर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए मंदिर में प्रवेश दे दिया गया। भीड़ के चलते वहां से लोगों को हटाने और अगली आरती के लिए पूजन प्रक्त्रिस्या शुरू करने में सप्तऋषि आरती के अर्चकों को काफी दिक्कत हुई। ऐसे में रात्रि ढाई बजे समाप्त होने वाली दूसरे प्रहर की आरती करीब सवा तीन बजे पूरी की जा सकी। यह आरती रात्रि ढाई बजे पूरी हो जानी चाहिए थी। इस आरती के बाद भी तथाकथित वीआईपी दर्शनार्थियों को मंदिर में प्रवेश दे दिए जाने से तीसरे प्रहर की आरती भी विलंब से शुरू हुई। चौथे चरण की आरती शुरू होने तक यह विलंब दो घंटे तक पहुंच गया। ऐसे में पांच बजे भोर की बजाय चौथे चरण की आरती सुबह सात बजे शुरू हुई।
सप्तऋषि आरती के प्रधान अर्चक पं शशिभूषण तिवारी ने कहा कि महाशिवरात्रि की निशा में बाबा के विवाह की प्रक्रिया से लेकर चारों प्रहर की आरती तक की व्यवस्था सप्तऋषि आरती के अर्चकों के जिम्मे होती है। इस दौरान मंदिर प्रबंधन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता लेकिन बीती रात हर बार आरती के बाद वीआईपी के नाम पर लोगों को पुलिस और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग दर्शन कराने लग रहे थे जिसके चलते दूसरे प्रहर की आरती से ही विलंब होना शुरू हो गया था।
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मंदिर प्रबंधन और पुलिसकर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए मंदिर में प्रवेश दे दिया गया। भीड़ के चलते वहां से लोगों को हटाने और अगली आरती के लिए पूजन प्रक्त्रिस्या शुरू करने में सप्तऋषि आरती के अर्चकों को काफी दिक्कत हुई। ऐसे में रात्रि ढाई बजे समाप्त होने वाली दूसरे प्रहर की आरती करीब सवा तीन बजे पूरी की जा सकी। यह आरती रात्रि ढाई बजे पूरी हो जानी चाहिए थी। इस आरती के बाद भी तथाकथित वीआईपी दर्शनार्थियों को मंदिर में प्रवेश दे दिए जाने से तीसरे प्रहर की आरती भी विलंब से शुरू हुई। चौथे चरण की आरती शुरू होने तक यह विलंब दो घंटे तक पहुंच गया। ऐसे में पांच बजे भोर की बजाय चौथे चरण की आरती सुबह सात बजे शुरू हुई।
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सप्तऋषि आरती के प्रधान अर्चक पं शशिभूषण तिवारी ने कहा कि महाशिवरात्रि की निशा में बाबा के विवाह की प्रक्रिया से लेकर चारों प्रहर की आरती तक की व्यवस्था सप्तऋषि आरती के अर्चकों के जिम्मे होती है। इस दौरान मंदिर प्रबंधन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता लेकिन बीती रात हर बार आरती के बाद वीआईपी के नाम पर लोगों को पुलिस और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग दर्शन कराने लग रहे थे जिसके चलते दूसरे प्रहर की आरती से ही विलंब होना शुरू हो गया था।
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