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2100 तालाबों पर कब्जा
Updated Tue, 20 Jun 2017 11:47 PM IST
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बलिया। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल कुंडों व तालाबों को अतिक्रमणमुक्त करने का दावा जिले में फेल साबित हो रहा है। आदेश के बावजूद इनपर अवैध कब्जे बने हुए हैं और जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वर्ष 1950 के राजस्व रिकार्ड के अनुसार जिले में कुल तीन हजार 300 छोटे-बड़े तालाब व कुंड थे। इसके अलावा कुल दो हजार 200 कुंए भी थे। प्रशासन की माने तो 2100 तालाबों पर लोगों के कब्जे हैं।
रिकार्ड के अनुसार कुल तालाब व कुंडों का कुल रकबा 460 हेक्टेयर है। लेकिन जैसे-जैसे आबादी का विस्तार हुआ तालाब व कुंडों पर अतिक्रमण का दौर भी तेज हो गया। हालांकि दस्तावेजों में यह तालाब आज भी बरकरार हैं लेकिन धरातल पर इनका नामोनिशान तक नहीं है। जहां बचे है उनका भी अस्तित्व मिटने के कगार पर है। आलम यह है कि अधिकांश तालाब व कुंडों को भरकर लोगों ने अवैध तरीके से आलीशान मकान खड़ा कर लिए हैं। आए दिन किसी न किसी गांव से इस बाबत ग्रामीणों की ओर से शिकायत भी की जाती है लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इसे महीनों तक ठंडे बस्ते में रखते हैं और कार्रवाई नहीं की जाती है। प्रदेश में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने तालाब व कुंडों से अतिक्रमण हटाने को ड्रीम प्रोजेक्ट में रखा और अधिकारियों को तालाबों को अतिक्रमणमुक्त करने का निर्देश भी दिया। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं आज भी तालाब व कुंडो पर अतिक्रमण का दौर जारी है और शिकायत के बावजूद अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे रहते हैं। उदाहरण के लिए एनएच 31 के किनारे सोहांव ब्लाक के भरौली गांव के तालाबों को देखा जा सकता है। इस गांव में कुल सात एकड़ में नौ तालाब रिकार्ड में दर्ज हैं और इसमें तीन तालाब तो एनएच किनारे की है। लेकिन अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण बना हुआ है। हैरानी की बात है कि इस बावत गड़हा विकास मंच के अध्यक्ष चंद्रमणि राय ने दर्जनों बार अधिकारियों से लेकर तहसील दिवस पर शिकायत की लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा सोहांव ब्लाक के नारायनपुर में स्थित तालाब को देखें तो अतिक्रमण आज भी बरकरार है जबकि पांच साल पहले तत्कालीन एसडीएम की ओर से अतिक्रमण करने वालों जुर्माना लगाते हुए आदेश जारी किया लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह तो महज उदाहरण है जिले भर के तालाब व कुंडों पर अतिक्रमण बरकरार है।
न्यायालय को भी गुमराह कर रहा प्रशासन!
बलिया। करीब आठ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने तालाब, गड़ही, कुंए आदि को अतिक्रमणमुक्त करने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने अतिक्रमणमुक्त कर इसकी सूचना से अवगत कराने को भी कहा। बताया जाता है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन की ओर से निर्देश जारी किया गया। निर्देश के आधार पर जिला प्रशासन की ओर से हर महीने शासन को अतिक्रमणमुक्त की कार्रवाई के बावत रिपोर्ट भेजी जाती है। जिला प्रशासन के आंकड़ों को मानें तो जिले में एक हजार 200 तालाबों को अतिक्रमणमुक्त किया गया है जबकि धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। जिला प्रशासन कागजों पर ही कार्रवाई कर शासन व कोर्ट को गुमराह भी करता है।
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मनरेगा से बने तथा सफाई कराए गए तालाबों पर अतिक्रमण
बलिया। वर्ष 2002-03 में जनपद में नरेगा योजना का शुभारंभ हुआ हालांकि एक साल बाद इस योजना का नाम मनरेगा कर दिया गया। वर्ष 2003-04 में नरेगा के तहत हर गांवों में एक तालाब बनाने का अभियान चलाया गया। इसके अलावा गांवों में स्थित तालाबों को सफाई कराने का काम भी किया गया। लेकिन इन तालाबों पर धीरे-धीरे अतिक्रमण होता गया और राजस्व विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। उदाहरण के लिए सोहांव ब्लाक के भरौली गांव में तीन तालाबों की खोदाई मनरेगा के तहत की गई थी और लाखों रुपए खर्च हुए। लेकिन वर्तमान में इन तालाबों पर इस कदर अतिक्रमण है कि घरों का पानी सड़कों पर गिर रहा है।
तालाबों व कुंडों पर किए अतिक्रमण को हटाने के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। इस बावत तैयारी की जा रही है और अतिक्रमण करने को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया जाएगा। इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा तो उसे प्रशासन की ओर से हटवाया जाएगा। -मनोज सिंघल, एडीएम, बलिया
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रिकार्ड के अनुसार कुल तालाब व कुंडों का कुल रकबा 460 हेक्टेयर है। लेकिन जैसे-जैसे आबादी का विस्तार हुआ तालाब व कुंडों पर अतिक्रमण का दौर भी तेज हो गया। हालांकि दस्तावेजों में यह तालाब आज भी बरकरार हैं लेकिन धरातल पर इनका नामोनिशान तक नहीं है। जहां बचे है उनका भी अस्तित्व मिटने के कगार पर है। आलम यह है कि अधिकांश तालाब व कुंडों को भरकर लोगों ने अवैध तरीके से आलीशान मकान खड़ा कर लिए हैं। आए दिन किसी न किसी गांव से इस बाबत ग्रामीणों की ओर से शिकायत भी की जाती है लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इसे महीनों तक ठंडे बस्ते में रखते हैं और कार्रवाई नहीं की जाती है। प्रदेश में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने तालाब व कुंडों से अतिक्रमण हटाने को ड्रीम प्रोजेक्ट में रखा और अधिकारियों को तालाबों को अतिक्रमणमुक्त करने का निर्देश भी दिया। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं आज भी तालाब व कुंडो पर अतिक्रमण का दौर जारी है और शिकायत के बावजूद अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे रहते हैं। उदाहरण के लिए एनएच 31 के किनारे सोहांव ब्लाक के भरौली गांव के तालाबों को देखा जा सकता है। इस गांव में कुल सात एकड़ में नौ तालाब रिकार्ड में दर्ज हैं और इसमें तीन तालाब तो एनएच किनारे की है। लेकिन अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण बना हुआ है। हैरानी की बात है कि इस बावत गड़हा विकास मंच के अध्यक्ष चंद्रमणि राय ने दर्जनों बार अधिकारियों से लेकर तहसील दिवस पर शिकायत की लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा सोहांव ब्लाक के नारायनपुर में स्थित तालाब को देखें तो अतिक्रमण आज भी बरकरार है जबकि पांच साल पहले तत्कालीन एसडीएम की ओर से अतिक्रमण करने वालों जुर्माना लगाते हुए आदेश जारी किया लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह तो महज उदाहरण है जिले भर के तालाब व कुंडों पर अतिक्रमण बरकरार है।
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न्यायालय को भी गुमराह कर रहा प्रशासन!
बलिया। करीब आठ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने तालाब, गड़ही, कुंए आदि को अतिक्रमणमुक्त करने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने अतिक्रमणमुक्त कर इसकी सूचना से अवगत कराने को भी कहा। बताया जाता है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन की ओर से निर्देश जारी किया गया। निर्देश के आधार पर जिला प्रशासन की ओर से हर महीने शासन को अतिक्रमणमुक्त की कार्रवाई के बावत रिपोर्ट भेजी जाती है। जिला प्रशासन के आंकड़ों को मानें तो जिले में एक हजार 200 तालाबों को अतिक्रमणमुक्त किया गया है जबकि धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। जिला प्रशासन कागजों पर ही कार्रवाई कर शासन व कोर्ट को गुमराह भी करता है।
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मनरेगा से बने तथा सफाई कराए गए तालाबों पर अतिक्रमण
बलिया। वर्ष 2002-03 में जनपद में नरेगा योजना का शुभारंभ हुआ हालांकि एक साल बाद इस योजना का नाम मनरेगा कर दिया गया। वर्ष 2003-04 में नरेगा के तहत हर गांवों में एक तालाब बनाने का अभियान चलाया गया। इसके अलावा गांवों में स्थित तालाबों को सफाई कराने का काम भी किया गया। लेकिन इन तालाबों पर धीरे-धीरे अतिक्रमण होता गया और राजस्व विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। उदाहरण के लिए सोहांव ब्लाक के भरौली गांव में तीन तालाबों की खोदाई मनरेगा के तहत की गई थी और लाखों रुपए खर्च हुए। लेकिन वर्तमान में इन तालाबों पर इस कदर अतिक्रमण है कि घरों का पानी सड़कों पर गिर रहा है।
तालाबों व कुंडों पर किए अतिक्रमण को हटाने के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। इस बावत तैयारी की जा रही है और अतिक्रमण करने को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया जाएगा। इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा तो उसे प्रशासन की ओर से हटवाया जाएगा। -मनोज सिंघल, एडीएम, बलिया