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लटक गई कोलिया-रिजुल-शिल्पी मार्ग की फाइल
Updated Tue, 13 Jun 2017 10:03 PM IST
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सोनभद्र। यूपी और एमपी को जोड़ने वाला कोलिया घाट-रिजुल-शिल्पी संपर्क मार्ग डेढ़ करोड़ रुपये की स्वीकृति के बावजूद नहीं बनाया गया। वन विभाग का प्रतिकर 95 लाख रुपये भुगतान के बाद ही निर्माण की अनुमति मिल सकेेगी। पीडब्ल्यूडी को यह भुगतान करना है लेकिन करीब पांच माह से प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी के यहां यह फाइल डंप है। जबकि निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। निर्माण न होने का खामियाजा क्षेत्रीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
सपा सरकार में घोरावल के तत्कालीन विधायक रमेश चंद्र दूबे ने यूपी और एमपी को जोड़ने वाले कोलिया घाट से रिजुल-शिल्पी संपर्क मार्ग के निर्माण का वादा क्षेत्र की जनता से किया था। इसके लिए उन्होंने प्रयास शुरू किया। शासन ने कोलिया से 1.6 किमी कोरट और 1.4 किमी शिल्पी तक के निर्माण के लिए एक करोड़ 48 लाख रुपये की स्वीकृति तो दे दी लेकिन वन विभाग ने सड़क निर्माण के लिए अनुमति नहीं दी। राज्य वन्य जीव बोर्ड से लेकर केंद्रीय वन विभाग तक स्वीकृति के लिए तब से प्रयास किया जाना शुरू किया गया। काफी प्रयास के बाद करीब छह माह पूर्व वन विभाग से सड़क निर्माण की अनुमति भी मिल गई लेकिन अब भी निर्माण को लेकर पेंच फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग को वन विभाग के पक्ष में प्रतिकर का 95 लाख रुपये भुगतान करना है। इसकी फाइल करीब पांच माह से लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव के यहां डंप पड़ी है लेकिन अब तक उसमें कोई फैसला नहीं हो सका है। इससे सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका है। गौरतलब है कि घोरावल से सटे मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों के लोग कोलिया घाट से ही होकर घोरावल बाजार आते हैं। यहां से खरीदारी बड़े पैमाने पर करते हैं। इस नाते एमपी के कुछ हिस्सों का व्यवसायिक रिश्ता घोरावल से है। यदि कोलिया घाट-रिजुल-शिल्पी मार्ग का निर्माण हो जाएगा तो इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
पूर्व विधायक रमेश चंद्र दूबे का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए शासन से धन आवंटित करा लिया गया। टेंडर की प्रक्रिया भी पूर्ण हो गई लेकिन सिर्फ वन विभाग की एनओसी प्राप्त करने में ही कार्यकाल बीत गया। इससे यह कार्य अधर में लटक गया। यदि सपा सरकार रहती तो यह सड़क अब तक बनकर तैयार हो गई होती।
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सपा सरकार में घोरावल के तत्कालीन विधायक रमेश चंद्र दूबे ने यूपी और एमपी को जोड़ने वाले कोलिया घाट से रिजुल-शिल्पी संपर्क मार्ग के निर्माण का वादा क्षेत्र की जनता से किया था। इसके लिए उन्होंने प्रयास शुरू किया। शासन ने कोलिया से 1.6 किमी कोरट और 1.4 किमी शिल्पी तक के निर्माण के लिए एक करोड़ 48 लाख रुपये की स्वीकृति तो दे दी लेकिन वन विभाग ने सड़क निर्माण के लिए अनुमति नहीं दी। राज्य वन्य जीव बोर्ड से लेकर केंद्रीय वन विभाग तक स्वीकृति के लिए तब से प्रयास किया जाना शुरू किया गया। काफी प्रयास के बाद करीब छह माह पूर्व वन विभाग से सड़क निर्माण की अनुमति भी मिल गई लेकिन अब भी निर्माण को लेकर पेंच फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग को वन विभाग के पक्ष में प्रतिकर का 95 लाख रुपये भुगतान करना है। इसकी फाइल करीब पांच माह से लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव के यहां डंप पड़ी है लेकिन अब तक उसमें कोई फैसला नहीं हो सका है। इससे सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका है। गौरतलब है कि घोरावल से सटे मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों के लोग कोलिया घाट से ही होकर घोरावल बाजार आते हैं। यहां से खरीदारी बड़े पैमाने पर करते हैं। इस नाते एमपी के कुछ हिस्सों का व्यवसायिक रिश्ता घोरावल से है। यदि कोलिया घाट-रिजुल-शिल्पी मार्ग का निर्माण हो जाएगा तो इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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पूर्व विधायक रमेश चंद्र दूबे का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए शासन से धन आवंटित करा लिया गया। टेंडर की प्रक्रिया भी पूर्ण हो गई लेकिन सिर्फ वन विभाग की एनओसी प्राप्त करने में ही कार्यकाल बीत गया। इससे यह कार्य अधर में लटक गया। यदि सपा सरकार रहती तो यह सड़क अब तक बनकर तैयार हो गई होती।
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