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ऐसे हट चुका वरुणा और असि का अतिक्रमण
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वाराणसी। जिस तरह से विभागीय अधिकारी सुस्त हैं उससे न तो असि और वरुणा से अतिक्रमण हटने वाला है और न ही दोनों नदियां साफ होने वाली हैं। जी हां, पिछले 15 दिनों में न तो नगर निगम ने कुछ किया है और न ही वीडीए ने। रही बात राजस्व विभाग की तो वह तो पहले से ही आंख बंद करके बैठा हुआ है।
एनजीटी पूर्वी यूपी के चेयरमैन न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह ने 28 जनवरी को सर्किट हाउस में एक प्रेसवार्ता की थी, जिसमें उन्होंने शहर की अव्यवस्था के साथ ही असि और वरुणा का अतिक्रमण हटाने और उसके दोनों किनारे पर पेड़ पौधे लगाने का आदेश दिया था, साथ ही बताया था कि नगर निगम, राजस्व और वीडीए के अलावा सिंचाई विभाग और वन विभाग को भी इस पूरे प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। जिनको अधिकतम 10 दिनों में अपना कार्य शुरू करना था, लेकिन 15 दिन बीत गए और यह आदेश जस का तस बना हुआ है। ऐसे में असि और वरुणा को अतिक्रमण से मुक्ति दिलाने को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन विभागों को ये दी गई थी जिम्मेदारी
एनजीटी के पदाधिकारियों के अनुसार इन दोनों नदियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नगर निगम, वीडीए और राजस्व को सिंचाई विभाग के साथ मिलकर एक सर्वे करना था। इसमें कितने अतिक्रमण हैं। इनमें कितने भवनों का नक्शा पास है और कितने का नहीं है। सिंचाई विभाग के पास जो दस्तावेज हैं, उनके अनुसार कितना अतिक्रमण है। राजस्व विभाग के अभिलेखों में तीन से चार दशक पहले किस नाम से जमीन थी और किस आधार पर अभिलेखों में परिवर्तन करके इन जमीनों को लोगों ने अपने नाम करा लिया है। जब अतिक्रमण चिह्नित हो जाएंगे तो नगर निगम और वीडीए राजस्व के अधिकारियों की देखरेख में अतिक्रमण हटाएंगे। वन विभाग पौधरोपण करेगा।
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एनजीटी पूर्वी यूपी के चेयरमैन न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह ने 28 जनवरी को सर्किट हाउस में एक प्रेसवार्ता की थी, जिसमें उन्होंने शहर की अव्यवस्था के साथ ही असि और वरुणा का अतिक्रमण हटाने और उसके दोनों किनारे पर पेड़ पौधे लगाने का आदेश दिया था, साथ ही बताया था कि नगर निगम, राजस्व और वीडीए के अलावा सिंचाई विभाग और वन विभाग को भी इस पूरे प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। जिनको अधिकतम 10 दिनों में अपना कार्य शुरू करना था, लेकिन 15 दिन बीत गए और यह आदेश जस का तस बना हुआ है। ऐसे में असि और वरुणा को अतिक्रमण से मुक्ति दिलाने को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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इन विभागों को ये दी गई थी जिम्मेदारी
एनजीटी के पदाधिकारियों के अनुसार इन दोनों नदियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नगर निगम, वीडीए और राजस्व को सिंचाई विभाग के साथ मिलकर एक सर्वे करना था। इसमें कितने अतिक्रमण हैं। इनमें कितने भवनों का नक्शा पास है और कितने का नहीं है। सिंचाई विभाग के पास जो दस्तावेज हैं, उनके अनुसार कितना अतिक्रमण है। राजस्व विभाग के अभिलेखों में तीन से चार दशक पहले किस नाम से जमीन थी और किस आधार पर अभिलेखों में परिवर्तन करके इन जमीनों को लोगों ने अपने नाम करा लिया है। जब अतिक्रमण चिह्नित हो जाएंगे तो नगर निगम और वीडीए राजस्व के अधिकारियों की देखरेख में अतिक्रमण हटाएंगे। वन विभाग पौधरोपण करेगा।
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