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महीनों से बना था गतिरोध, आखिर सुभासपा अलग हो ही गई
Wed, 17 Apr 2019 10:35 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2019 10:35 AM IST
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उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी आखिर अलग हो ही गई। वैसे इसका संकेत ओमप्रकाश राजभर ने एक दिन पहले ही यहां केंद्रीय कार्यालय में दे दिया था।
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ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि उन्होंने प्रदेश सरकार से इस्तीफा देने की पेशकश की थी पर कोई लेने को तैयार ही नहीं हुआ। मुख्यमंत्री और उनके सचिव ने फोन तक नहीं उठाया। गौरतलब है कि पिछले दिनों ओमप्रकाश राजभर के विरोध और गठबंधन से अलग होने के उनके तेवरों को देखते हुए भाजपा ने उनके पुत्र अरविंद राजभर को कानपुर औद्योगिक निगम का अध्यक्ष बना दिया था। इसके अलावा पार्टी के तीन अन्य प्रतिनिधियों को भी कई समितियों में पद दिए गए थे। भाजपा को उम्मीद थी कि राजभर इससे संतुष्ट हो जाएंगे। पर ऐसा नहीं हुआ।
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वह भाजपा से लगातार प्रदेश की दो से तीन सीटों पर सुभासपा के सिंबल पर टिकट की मांग करते रहे। यह पार्टी के पदाधिकारियों को नागवार गुजरा। ओमप्रकाश राजभर ने मंगलवार को कहा कि भाजपा से लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत होने के बावजूद जब कोई नतीजा नहीं निकला तो यह कदम उठाना पड़ा। कहा कि भाजपा नेता चाहते थे कि वह घोसी लोकसभा सीट से लड़ें। वह भी भाजपा के सिंबल पर जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सपा, बसपा पर भी समाज के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व न देने का आरोप लगाया। कहा कि वह पिछड़े और शोषितों के लिए आवाज बुलंद करते रहेंगे।
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