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मुख्यमंत्री जी! कब मिलेगा 100 बेड का अस्पताल
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:44 AM IST
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ज्ञानपुर। जिला मुख्यालय के सामने एक दशक से निर्माणाधीन 100 शैय्या का अस्पताल कुछ दिन पूर्व भले ही स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है लेकिन बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक नहीं किए गए। यही नहीं, अभी तक कर्मचारियों और चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी। साथ ही चिकित्सीय उपकरण और जरूरी संसाधन भी नहीं मुहैया कराए गए। निर्माण कार्य में विलंब के चलते सरकार को करीब चार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बाद भी अभी आम जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार में जिला मुख्यालय के सामने 100 बेड का जिला अस्पताल स्वीकृत हुआ था। 14 करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को दी गई थी। अस्पताल को वर्ष 2012-13 तक हैंडओवर करना था लेकिन ठेकेदारों और कार्यदायी संस्था की लापरवाही से तय समय में अस्पताल पूर्ण नहीं हो सका। शासन-प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद आखिरकार छह साल विलंब से 2018 में अस्पताल को कार्यदायी संस्था ने हैंडओवर कर दिया हालांकि लेटलतीफी के चलते 14 करोड़ से लागत बढ़ कर 18 करोड़ तक पहुंच गई। हैंडओवर होने के बाद भी चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी से अस्पताल में उपचार शुरू नहीं हो सका है। गत दिनों विंध्याचल मंडल की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल को शीघ्र चालू करने का निर्देश दिया था लेकिन अब तक अस्पताल भवन में बिजली आपूर्ति समेत कई कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। दो दिन बाद जिले में सीएम का आगमन भी होना है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि अस्पताल जल्द ही आम लोगों के लिए समर्पित होगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश सिंह ने कहा कि चिकित्सकों की मांग शासन से की गई है, मिलने पर उसे संचालित किया जाएगा।
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स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार में जिला मुख्यालय के सामने 100 बेड का जिला अस्पताल स्वीकृत हुआ था। 14 करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को दी गई थी। अस्पताल को वर्ष 2012-13 तक हैंडओवर करना था लेकिन ठेकेदारों और कार्यदायी संस्था की लापरवाही से तय समय में अस्पताल पूर्ण नहीं हो सका। शासन-प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद आखिरकार छह साल विलंब से 2018 में अस्पताल को कार्यदायी संस्था ने हैंडओवर कर दिया हालांकि लेटलतीफी के चलते 14 करोड़ से लागत बढ़ कर 18 करोड़ तक पहुंच गई। हैंडओवर होने के बाद भी चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी से अस्पताल में उपचार शुरू नहीं हो सका है। गत दिनों विंध्याचल मंडल की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल को शीघ्र चालू करने का निर्देश दिया था लेकिन अब तक अस्पताल भवन में बिजली आपूर्ति समेत कई कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। दो दिन बाद जिले में सीएम का आगमन भी होना है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि अस्पताल जल्द ही आम लोगों के लिए समर्पित होगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश सिंह ने कहा कि चिकित्सकों की मांग शासन से की गई है, मिलने पर उसे संचालित किया जाएगा।
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