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सोते हुए को गोलियों से भून डालना यह किस मजहब ने कहा...
Updated Thu, 22 Mar 2018 02:31 AM IST
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वाराणसी। जेहाद का मतलब है कि ऐलान करके दुश्मन के सामने आना और जंग करना, न कि पीठ पीछे गोलियां बरसाना। सोते हुए को गोलियाें से भून डालना यह किस मजहब ने कहा है। मजहब कहता है कि दुश्मन अगर सोया हुआ है तो उसे जगाओ। जब वह हाथों में हथियार ले ले तब उसके साथ लड़ो। उक्त संवाद ने कश्मीर के आतंकवाद और उससे जूझने वाले लोगों के दर्द को नागरी नाटक मंडली के मंच पर जीवंत किया। प्ले इन ए प्ले तकनीक के माध्यम से कलाकारों ने सभी के दिलों को छू लिया।
थिएटर ओलंपिक में बुधवार को ए.एल.जी कल्चरल सोसायटी जम्मू की ओर से मोतीलाल क्यूम का लिखित और रवि शंकर क्यूम का निर्देशित कश्मीरी नाट भांड दुहाई का मंचन किया गया। नाटक और उसके संवादों ने मौजूद दर्शकों को हर एक कश्मीरी के दर्द को महसूस करा दिया। नाटक में आतंकवादी हिंसा के दुष्परिणामों से उत्पन्न उस लोक संस्कृति के विलुप्त होने के बारे में दर्शाया गया है, जिन पर कश्मीर का लोकाचार टिका है। इसमें भांडों के एक गांव के एक मागुन के माध्यम से आम कश्मीरी के मन में आतंकवादियों और उनकी विचारधारा के प्रति पनप रहे रोष और विद्रोह की ओर संकेत किया गया है। नाटक में मागुन को अपने इकलौते बेटे और खुद अपनी जान की कीमत देकर इन परंपराओं और मूल्यों की रक्षा करते हुआ दिखाया गया है।
मागुन को लोक अभिनेत्री शमीमा की आतंकवादियों द्वारा हत्या किये जाने के बारे में पता चलता है। वह अपनी मंडली के सदस्यों को अपनी झोपड़ी में बुलाता है। उसका एकमात्र बेटा, नंदा आतंकवादी गुट में शामिल हो जाता है। मंडली के सदस्य एकनंदन, अकेली संतान के मंचन का फैसला करते हैं। नाटककार, एकनंदन की कहानी को बाहरी दुनिया की वास्तविक घटनाओं से जोड़ने के लिए प्ले-इन-ए-प्ले तकनीक का उपयोग करता है।
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नाटक के दौरान मागुन की पत्नी, भांड बाई, एक अभिनेता के साथ मंच पर प्रवेश करती है। वह नंदा का मृत शरीर अपनी पीठ पर लेकर आता है। मागुन उसे नंदा का जीवन वापस लाने को कहती है, और वह नाटक में एकनंदन को जीवित कर देता है। तभी मुखौटे के पीछे छुपे वो आतंकवादी, जिन्होंने नंदा को गोली मारी थी अन्दर आते हैं और मागुन को गोली मार देते हैं। भांड बाई बच जाती है और साहस का प्रतीक बनती है, वह सबको सांत्वना देती है, उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है और आतंकवादियों की चुनौतियों के खिलाफ उनका नेतृत्व करती है। नाटक में मागुन की भूमिका में बलविंदर, भांड की भूमिका में कुसुम टिक्कू, राजा की भूमिका में विनय पंडित, अनिल भट्ट, रोहित वर्मा, वरुण शर्मा, सुशील रैना, रोहिताश्व, ऋषभ, रश्मेश पंडित, दीपशिखा, शीतल, इशू, नेहा, देवांक्षी, आयुषी, सरस आदि ने बेहतरीन अभिनय प्रस्तुत किया। प्रकाश राहुल चौहान, मंच प्रबंधक दीपांकर शर्मा, संगीत रवि क्यूम, नृत्य देवांक्षी का रहा।
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थिएटर ओलंपिक में बुधवार को ए.एल.जी कल्चरल सोसायटी जम्मू की ओर से मोतीलाल क्यूम का लिखित और रवि शंकर क्यूम का निर्देशित कश्मीरी नाट भांड दुहाई का मंचन किया गया। नाटक और उसके संवादों ने मौजूद दर्शकों को हर एक कश्मीरी के दर्द को महसूस करा दिया। नाटक में आतंकवादी हिंसा के दुष्परिणामों से उत्पन्न उस लोक संस्कृति के विलुप्त होने के बारे में दर्शाया गया है, जिन पर कश्मीर का लोकाचार टिका है। इसमें भांडों के एक गांव के एक मागुन के माध्यम से आम कश्मीरी के मन में आतंकवादियों और उनकी विचारधारा के प्रति पनप रहे रोष और विद्रोह की ओर संकेत किया गया है। नाटक में मागुन को अपने इकलौते बेटे और खुद अपनी जान की कीमत देकर इन परंपराओं और मूल्यों की रक्षा करते हुआ दिखाया गया है।
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मागुन को लोक अभिनेत्री शमीमा की आतंकवादियों द्वारा हत्या किये जाने के बारे में पता चलता है। वह अपनी मंडली के सदस्यों को अपनी झोपड़ी में बुलाता है। उसका एकमात्र बेटा, नंदा आतंकवादी गुट में शामिल हो जाता है। मंडली के सदस्य एकनंदन, अकेली संतान के मंचन का फैसला करते हैं। नाटककार, एकनंदन की कहानी को बाहरी दुनिया की वास्तविक घटनाओं से जोड़ने के लिए प्ले-इन-ए-प्ले तकनीक का उपयोग करता है।
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नाटक के दौरान मागुन की पत्नी, भांड बाई, एक अभिनेता के साथ मंच पर प्रवेश करती है। वह नंदा का मृत शरीर अपनी पीठ पर लेकर आता है। मागुन उसे नंदा का जीवन वापस लाने को कहती है, और वह नाटक में एकनंदन को जीवित कर देता है। तभी मुखौटे के पीछे छुपे वो आतंकवादी, जिन्होंने नंदा को गोली मारी थी अन्दर आते हैं और मागुन को गोली मार देते हैं। भांड बाई बच जाती है और साहस का प्रतीक बनती है, वह सबको सांत्वना देती है, उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है और आतंकवादियों की चुनौतियों के खिलाफ उनका नेतृत्व करती है। नाटक में मागुन की भूमिका में बलविंदर, भांड की भूमिका में कुसुम टिक्कू, राजा की भूमिका में विनय पंडित, अनिल भट्ट, रोहित वर्मा, वरुण शर्मा, सुशील रैना, रोहिताश्व, ऋषभ, रश्मेश पंडित, दीपशिखा, शीतल, इशू, नेहा, देवांक्षी, आयुषी, सरस आदि ने बेहतरीन अभिनय प्रस्तुत किया। प्रकाश राहुल चौहान, मंच प्रबंधक दीपांकर शर्मा, संगीत रवि क्यूम, नृत्य देवांक्षी का रहा।