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जिला जेल से सात मोबाइल बरामद होने पर हंगामा
Updated Sun, 04 Feb 2018 02:32 AM IST
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वाराणसी। जिला जेल की बैरक नंबर तीन में निरुद्ध पांच बंदियों के पास से सात मोबाइल बरामद होने पर शनिवार को हंगामा खड़ा हो गया। मोबाइल बंदियों तक कैसे पहुंचा, इसे लेकर बंदीरक्षक और जेलर आमने-सामने आ गए। एक-दूसरे पर बंदियों से मिलीभगत का आरोप लगाए जाने से माहौल और तल्ख हो उठा। तमाम बंदी भी जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए हंगामे पर उतर आए। स्थिति अनियंत्रित होती देख जेलर ने पगली घंटी बजाई। जेल पुलिस फोर्स के साथ ही एडीएम प्रशासन और एसपी सिटी के नेतृत्व में पांच थानों की पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंची। बैरक नंबर दो, तीन और चार की तलाशी लेकर माहौल सामान्य कराया गया। इस दौरान करीब ढाई घंटे तक जेल में अफरातफरी मची रही। मामले में जेलर ने बैरक नंबर तीन के पांच बंदियों के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
दोपहर करीब सवा 12 बजे सड़क की तरफ से जिला जेल की बैरक नंबर तीन की ओर फेंके गए मोबाइल पर वहां तैनात बंदीरक्षक की नजर पड़ी। बंदीरक्षकों का आरोप है कि उन्होंने इसकी जानकारी जेलर पीके त्रिवेदी को दी तो उन्होंने गालीगलौज की और उन पर बंदियों से मिलीभगत का आरोप लगाया। जबकि, बिना अधिकारियों की मर्जी के जेल में मोबाइल नहीं आ सकता। वहीं, जेलर ने बताया कि बंदीरक्षक ने उन्हें सूचना दी तो वो बैरक नंबर तीन की तलाशी लेने पहुंचे। वहां विरोध में बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति अनियंत्रित प्रतीत हुई तो पगली घंटी बजाकर फोर्स बुलाई गई। प्रभारी जेल अधीक्षक के साथ ही डीएम को सूचना दी। फोर्स के आने पर बैरक नंबर दो, तीन और चार की तलाशी ली गई। बैरक नंबर तीन में निरुद्ध आबिद सिद्दीकी, राजीव पांडेय उर्फ वकील, अतुल सिंह, विवेक सिंह, आशुतोष सिंह के पास से सात मोबाइल और एक चार्जर बरामद हुआ। बंदीरक्षकों के आरोप पर जेलर ने कहा कि कड़ाई और सही से ड्यूटी करने की ताकीद पर अनर्गल बातें कहीं जा रही हैं। इस बारे में सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक और जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक अंबरीष गौड़ ने बताया कि जिन बंदियों के पास से मोबाइल बरामद हुआ उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। जांच की जा रही है कि आखिर किसकी मिलीभगत से मोबाइल जेल के भीतर पहुंचा।
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दोपहर करीब सवा 12 बजे सड़क की तरफ से जिला जेल की बैरक नंबर तीन की ओर फेंके गए मोबाइल पर वहां तैनात बंदीरक्षक की नजर पड़ी। बंदीरक्षकों का आरोप है कि उन्होंने इसकी जानकारी जेलर पीके त्रिवेदी को दी तो उन्होंने गालीगलौज की और उन पर बंदियों से मिलीभगत का आरोप लगाया। जबकि, बिना अधिकारियों की मर्जी के जेल में मोबाइल नहीं आ सकता। वहीं, जेलर ने बताया कि बंदीरक्षक ने उन्हें सूचना दी तो वो बैरक नंबर तीन की तलाशी लेने पहुंचे। वहां विरोध में बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति अनियंत्रित प्रतीत हुई तो पगली घंटी बजाकर फोर्स बुलाई गई। प्रभारी जेल अधीक्षक के साथ ही डीएम को सूचना दी। फोर्स के आने पर बैरक नंबर दो, तीन और चार की तलाशी ली गई। बैरक नंबर तीन में निरुद्ध आबिद सिद्दीकी, राजीव पांडेय उर्फ वकील, अतुल सिंह, विवेक सिंह, आशुतोष सिंह के पास से सात मोबाइल और एक चार्जर बरामद हुआ। बंदीरक्षकों के आरोप पर जेलर ने कहा कि कड़ाई और सही से ड्यूटी करने की ताकीद पर अनर्गल बातें कहीं जा रही हैं। इस बारे में सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक और जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक अंबरीष गौड़ ने बताया कि जिन बंदियों के पास से मोबाइल बरामद हुआ उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। जांच की जा रही है कि आखिर किसकी मिलीभगत से मोबाइल जेल के भीतर पहुंचा।
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