{"_id":"5a5a63334f1c1bdd408b4b3d","slug":"101515873075-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने जिलाधिकारी से मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने जिलाधिकारी से मांगी रिपोर्ट
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने नई बाजार के जाहिदपुर स्थित कालीन के कारखाने से मुक्त कराए गए 10 बाल श्रमिकों के संबंध में गई कानूनी कार्रवाई की रिपोर्ट जिलाधिकारी भदोही से तलब की है। एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए आयोग ने यह आदेश दिया है।
करीब एक महीने पहले भदोही कोतवाली क्षेत्र के जाहिदपुर में निसार अहमद के कालीन कारखाने से 10 बाल श्रमिकों को श्रम विभाग और पुलिस की टीम ने मुक्त कराया था। मेडिकल कराने के बाद सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश कर इन बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया था। बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता क्रांति भूषण ने इस मामले में कारखाना मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने, बच्चों को पुनर्वास, मुक्ति प्रमाणपत्र समेत अन्य योजनाओं का लाभ न देने के का आरोप लगाते हुए डीएम और एसपी से शिकायत की थी। आरोप लगाया इसके बाद भी अधिकारियों ने कि कारखाना मालिक के खिलाफ बंधुआ श्रम अधिनियम, जेजे एक्ट, बाल और किशोर श्रम अधिनियम, कारखाना अधिनियम अंतर राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम में किसी के तहत कोई कार्रवाई नहीं की। इससे नाराज कार्यकर्ता ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को पत्र भेजकर मामले की शिकायत की थी। इसे संज्ञान में लेते हुए आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने 15 दिन के अंदर प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट डीएम से मांगी। वहीं, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मो. अब्बास ने बताया कि बाल श्रमिक पुनर्वास पैकेज में नहीं आते। शैक्षिक पुनर्वास के लिए संबंधित शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा गया है जबकि मुकदमा दर्ज कराने का काम उनके विभाग का नहीं है।
विज्ञापन
करीब एक महीने पहले भदोही कोतवाली क्षेत्र के जाहिदपुर में निसार अहमद के कालीन कारखाने से 10 बाल श्रमिकों को श्रम विभाग और पुलिस की टीम ने मुक्त कराया था। मेडिकल कराने के बाद सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश कर इन बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया था। बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता क्रांति भूषण ने इस मामले में कारखाना मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने, बच्चों को पुनर्वास, मुक्ति प्रमाणपत्र समेत अन्य योजनाओं का लाभ न देने के का आरोप लगाते हुए डीएम और एसपी से शिकायत की थी। आरोप लगाया इसके बाद भी अधिकारियों ने कि कारखाना मालिक के खिलाफ बंधुआ श्रम अधिनियम, जेजे एक्ट, बाल और किशोर श्रम अधिनियम, कारखाना अधिनियम अंतर राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम में किसी के तहत कोई कार्रवाई नहीं की। इससे नाराज कार्यकर्ता ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को पत्र भेजकर मामले की शिकायत की थी। इसे संज्ञान में लेते हुए आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने 15 दिन के अंदर प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट डीएम से मांगी। वहीं, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मो. अब्बास ने बताया कि बाल श्रमिक पुनर्वास पैकेज में नहीं आते। शैक्षिक पुनर्वास के लिए संबंधित शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा गया है जबकि मुकदमा दर्ज कराने का काम उनके विभाग का नहीं है।
विज्ञापन