बीएचयू के 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों को वेतन का इंतजार, आरबीआई के नए नियम से हो रही देरी
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बीएचयू के शिक्षकों, कर्मचारियाें का वेतन भुगतान नए नियमों की वजह से नहीं हो पा रहा है। आम तौर पर महीने के अंतिम दिन अथवा महीने के पहले दिन तक मिलने वाला वेतन अभी तीन दिन बाद तक खाते में नहीं पहुंचा है। इसको लेकर शिक्षकों, कर्मचारियों में निराशा का माहौल है। वेतन कब जारी होगा, इस बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही है।
विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों को मिलाकर संख्या करीब दस हजार है। आम तौर पर महीना पूरा होने के अंतिम दिन या फिर अगले दिन तक खाते में वेतन आ जाता था, लेकिन इस बार नवंबर महीना शुरू होने के बाद भी अक्तूबर का वेतन नहीं मिलने से शिक्षक-कर्मचारी परेशान हैं। अब तक यूजीसी के माध्यम से बैंक और फिर बैंक से सीधे खाते में वेतन आ जाता था।
इस बार आरबीआई के ट्रेजरी सिंगल अकाउंट से वेतन भुगतान होना है, इस वजह से ही व्यवस्था के लागू होने में थोड़ी देरी हो रही है। आने वाले दिनों में दीपावली का त्योहार है और लोगों को सामानों की खरीदारी भी करनी है, ऐसे में लोगों को त्योहार फीका पड़ने की चिंता भी सता रही है।
हालांकि इस तरह की स्थिति केवल बीएचयू की ही नहीं बल्कि देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हैं। इस बीच कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वेतन न मिलने को लेकर पोस्ट डालकर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए वेतन की मांग की है।
वेतन भुगतान आरबीआई के ट्रेजरी सिंगल अकाउंट के माध्यम से होना है। इसकी प्रकिया चल रही है। इस बारे में शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी सहित अन्य जगहों पर बातचीत हुई है। जल्द ही वेतन का भुगतान हो जाएगा।
अभय ठाकुर, वित्ताधिकारी, बीएचयू
बीएचयू अस्पताल में एमएस नियुक्ति का मामला गरमाया, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री, ईसी मेंबर से शिकायत
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में स्थायी एमएस की नियुक्ति का मामला गरमाता जा रहा है। जहां विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पद पर साक्षात्कार की तैयारी चल रही है, वहीं इससे पहले ही पूर्व में एमएस रह चुके डॉ. ओपी उपाध्याय ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री से नियमों की अनदेखी की शिकायत की है। इसकी कॉपी ईसी मेंबर, कुलपति, रेक्टर, कुलसचिव को भी दी गई है।
अस्पताल में एमएस पद को लेकर दीपावली से पहले साक्षात्कार होना है। इधर इसकी जानकारी होने के बाद ही पूर्व एमएस ने मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षामंत्री आदि को भेजे शिकायत में डॉ. उपाध्याय ने कुलपति पर नियमों की अनदेखी कर एमएस की नियुक्ति का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की माग की है।
उनका कहना है कि इस पद के लिए 10 साल का प्रशासनिक अनुभव होना अनिवार्य है, लेकिन कुलपति द्वारा इस नियम को ताक पर रखकर नियुक्ति की तैयारी की जा रही है। इससे विश्वविद्यालय और अस्पताल की छवि खराब होगी। कहा कि अस्पताल में इस समय भारी भ्रष्टाचार है, यह जानते हुए भी ऐसा करना न्याय संगत नहीं है। इस बारे में पूछे जाने पर डॉ. उपाध्याय ने बताया कि न्याय नहीं मिला तो जरूरत पड़ने पर अपने हक के लिए धरने पर बैठने को भी बाध्य होना पड़ेगा।